NEET Student Case: अब नहीं बचेगा नीट छात्रा का गुनहगार! CBI करा सकती है 10 लोगों का 'लाई डिटेक्टर' टेस्ट, जानिए नार्को टेस्ट से यह कैसे है अलग
NEET Student Case: नीट छात्रा संदिग्ध मौत मामले में अब सीबीआई लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी में है।1 0 संदिग्ध लोगों का 'लाई डिटेक्टर' टेस्ट होगा। इसके लिए फिलहाल सीबीआई को कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।
NEET Student Case: राजधानी के चर्चित NEET छात्रा संदिग्ध मौत मामले में जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब जांच को आगे बढ़ाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट का सहारा ले सकती है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी करीब 10 लोगों का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने पर विचार कर रही है। हालांकि इसके लिए संबंधित व्यक्तियों की सहमति और अदालत की अनुमति अनिवार्य होगी।
अब तक ठोस सुराग नहीं
केस अपने हाथ में लेने के बाद CBI की टीम शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची थी, जहां से दो बैग में कई अहम साक्ष्य जब्त किए गए। एजेंसी की सबसे बड़ी चुनौती छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के डीएनए का संदिग्ध आरोपी के डीएनए सैंपल से मिलान कराना है। सोमवार को केस टेकओवर के 12 दिन बाद CBI की टीम एक बार फिर हॉस्टल पहुंची। इस दौरान टीम हॉस्टल संचालिका और दो वार्डेन के साथ परिसर में गई और करीब दो घंटे तक जांच-पड़ताल की।
जहानाबाद जाएगी टीम
छात्रा के कमरे का निरीक्षण किया गया। उस युवक से भी पूछताछ की गई जिसने सबसे पहले दरवाजा तोड़कर छात्रा को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला था। साथ ही उस गार्ड को भी बुलाया गया, जिसने छात्रा को गोद में लेकर नीचे उतारा था। सूत्रों के मुताबिक, CBI की टीम दोबारा जहानाबाद जाकर परिजनों से भी अतिरिक्त जानकारी जुटा सकती है। छात्रा के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी निकाल लिया गया है, जिसे खंगाला जा रहा है।
कैसे होता है पॉलीग्राफ टेस्ट?
पॉलीग्राफ टेस्ट में व्यक्ति के शरीर में होने वाले अनैच्छिक शारीरिक बदलाव जैसे हृदय गति, रक्तचाप, सांस लेने की दर और त्वचा की चालकता को मापा जाता है। यह सिद्धांत इस आधार पर काम करता है कि झूठ बोलते समय व्यक्ति को तनाव होता है, जिससे उसकी शारीरिक प्रतिक्रियाएं बदल जाती हैं। टेस्ट के दौरान व्यक्ति को कुर्सी पर बैठाकर उसके शरीर पर सेंसर लगाए जाते हैं। पॉलीग्राफ विशेषज्ञ सवाल पूछता है और कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रतिक्रियाओं का ग्राफ रिकॉर्ड किया जाता है।
भारत में क्या कहता है कानून?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं कराया जा सकता। यह व्यक्ति के मौलिक अधिकार विशेष रूप से अनुच्छेद 21 का उल्लंघन माना जाएगा। साथ ही, पॉलीग्राफ टेस्ट के परिणाम सीधे तौर पर अदालत में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होते, लेकिन जांच में सहायक हो सकते हैं।
नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट में अंतर
पॉलीग्राफ टेस्ट में केवल शारीरिक प्रतिक्रियाएं मापी जाती हैं, जबकि नार्को एनालिसिस टेस्ट में दवा देकर व्यक्ति को अर्ध-अचेत अवस्था में लाया जाता है, ताकि उससे जानकारी ली जा सके। दोनों प्रक्रियाओं के लिए कानूनी अनुमति और व्यक्ति की सहमति आवश्यक है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए CBI की जांच कई स्तरों पर जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या पॉलीग्राफ टेस्ट से इस रहस्यमयी मौत के मामले में कोई ठोस सुराग सामने आ पाएगा।
पटना से अनिल की रिपोर्ट