Bihar News: नेपाल सरकार का '62 रुपये' वाला फरमान! बिहार के सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप, क्या टूटेगा रोटी-बेटी का रिश्ता?

Bihar News: नेपाल सरकार के नए कस्टम नियमों ने मधेशी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाला है। नेपाल द्वारा लागू इस फैसले के बाद जहां आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है

नेपाल सरकार का फरमान - फोटो : social media

Bihar News: नेपाल सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिसका असर अब बिहार के लोगों पर भी देखने को मिलेगा। दरअसल, नेपाल सरकार ने नए कस्टम नियमों ने मधेशी क्षेत्रों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अप्रैल 2026 से लागू इस व्यवस्था के तहत भारत से 100 नेपाली रुपये (करीब 62 भारतीय रुपये) से अधिक का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई है। पहले हजारों रुपये की घरेलू खरीदारी पर भी टैक्स नहीं देना पड़ता था।

रसोई का बिगड़ा बजट 

इस फैसले का सीधा असर नेपाल के तराई इलाकों के आम लोगों की जेब पर पड़ा है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं किराना, तेल, साबुन, कपड़े और दवाइयों पर अब 5 से 80 प्रतिशत तक टैक्स लगने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। बीरगंज, विराटनगर और जनकपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों के लोग लंबे समय से भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं, जहां सामान अपेक्षाकृत सस्ता मिलता था।

छोटी सी खरीदारी पर भी टैक्स 

स्थानीय नेपाली नागरिकों का कहना है कि अब छोटी-सी खरीदारी पर भी टैक्स देना पड़ रहा है, जिससे आम जीवन महंगा हो गया है। वहीं सीमा पर सख्ती भी बढ़ा दी गई है। नेपाल की सशस्त्र पुलिस द्वारा चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया है। बैग की जांच, लाउडस्पीकर से चेतावनी और हर पैकेट की जांच की जा रही है।

नेपाली ग्राहकों की संख्या मं गिरावट 

इसका असर भारतीय सीमावर्ती बाजारों पर भी साफ दिख रहा है। रक्सौल, जोगबनी और सुनौली जैसे बाजारों में नेपाली ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। दुकानदारों का कहना है कि उनकी बिक्री काफी घट गई है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा नेपाल के ग्राहकों पर निर्भर था। 

रोटी-बेटी के संबंध पर पड़ेगा असर 

व्यापारियों के अनुसार, इस फैसले से न सिर्फ कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि भारत-नेपाल के पारंपरिक “रोटी-बेटी” संबंधों पर भी असर पड़ रहा है। मधेशी क्षेत्रों में इसको लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह सख्ती लंबे समय तक जारी रही, तो दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।