Bihar Politics: सीएम नीतीश के मंत्री हो गए लापता! मुख्यमंत्री का आदेश हुआ हवा-हवाई, प्रचंड बहुमत के बाद क्या सुस्त हुई एनडीए सरकार?

Bihar Politics: सीएम नीतीश के आदेश के बाद भी जेडीयू दफ्तर में जनता दरबार नहीं लग रहा है, इससे सियासी गलियारों में सवाल खड़े हो रहे हैं।

सीएम का आदेश हवा-हवाई! - फोटो : reporter

Bihar Politics:  बिहार में प्रचंड बहुमत से एनडीए सरकार ने सत्ता में तो वापसी कर ली लेकिन जमीनी स्तर पर सरकार की सुस्ती देखने को मिल रही है। दरअसल, सीएम नीतीश ने अपने सभी मंत्रियों को आदेश दिया था कि वो सोमवार से शुक्रवार तक अपने कार्यालय में बैठें और आम जनता की समस्याओं को सुनें। सीएम नीतीश ने सभी मंत्रियों को जनता दरबार लगाने का आदेश दिया था। लेकिन सीएम नीतीश के इस फरमान को मंत्री अब तक नहीं मानें हैं। आज दिन गुरुवार है लेकिन ना सिर्फ जदयू ऑफिस खाली है बल्कि जिन कमरों में जनता दरबार लगती थी उनमें भी ताला लटका हुआ है। अब सीएम नीतीश के आदेश को अब तक क्यों नहीं माना गया है इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं।      

जदयू ऑफिस में नहीं लग रहा जनता दरबार

जदयू ऑफिस में अब भी वही लिस्ट टंगी हुई है जो पुराने मंत्रियों की है। सोमवार को सीएम नीतीश जनता दरबार लगाते थे इस कारण सोमवार को किसी मंत्री का कार्यक्रम तय नहीं था। वहीं मंगलवार से मंत्रियों के द्वारा जनता दरबार लगाया जाता है। मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को अलग अलग मंत्री जनता दरबार लगाते थे। आम जनता की समस्याओं को सुनकर उसका सामाधान करते थे। लेकिन नई सरकार के गठन के बाद और सीएम नीतीश के आदेश के बाद भी जनता दरबार नहीं लग रहा है। 

सीएम नीतीश के फरमान का नहीं हो रहा पालन 

ना तो जदयू ऑफिस में नई लिस्ट और टाइम टेबल लगाई गई है तो ना ही कोई मंत्री जदयू ऑफिस पहुंचे। यानी कुल मिलाकर देखे तो नई सरकार के गठन होने के बाद कहीं ना कहीं इस फरमान के अनुरुप कार्य शुरु नहीं किया गया है। सीएम के फरमान को या तो उनके मंत्री भूल गए हैं या उनकी सुस्ती उन्हें सीएम के आदेश का पालन करने से रोक रही है। अब देखना होगा कि सीएम नीतीश के मंत्री कब एक्टिव मोड पर आते हैं और कब उनके आदेश के अनुसार जदयू दफ्तर में जनता दरबार लगनी शुरु होती है।

सीएम नीतीश ने मंत्रियों को दिया था टास्क

गौरतलब है कि 2020 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने मंत्रियों को भी जनता दरबार लगाने का टास्क दिया था। उस समय व्यवस्था यह थी कि सोमवार को स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दरबार लगाया करते थे, जबकि मंगलवार से शुक्रवार तक जदयू कोटे के मंत्री पार्टी कार्यालय में आम लोगों की समस्याएं सुनते थे। उस दौरान मंगलवार को वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी, लेसी सिंह और मदन सहनी जनता दरबार में मौजूद रहते थे। वहीं बुधवार को श्रवण कुमार, जयंत राज और शिक्षा मंत्री सुनील कुमार आम जनता की शिकायतें सुनते थे। गुरुवार को विजेंद्र यादव के साथ उस समय की परिवहन मंत्री शीला मंडल भी कार्यालय में बैठती थीं। जबकि शुक्रवार को अशोक चौधरी और चकाई से निर्दलीय विधायक रहे सुमित सिंह, जो जदयू के समर्थन से मंत्री बने थे, जनता दरबार में शामिल होते थे।

सरकार बनने के बाद बंद हुई व्यवस्था? 

हालांकि, प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनने के बाद यह व्यवस्था धीरे-धीरे बंद हो गई। मंत्रियों ने जनता दरबार लगाना लगभग छोड़ दिया और आम लोगों की सीधी पहुंच सीमित होती चली गई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सोमवार से शुक्रवार तक वे कार्यालय में बैठकर आम जनता की समस्याएं सुनें और उनका समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री के इस फरमान के बाद एक बार फिर जनता दरबार की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पटना से रंजन की रिपोर्ट