नीतीश कुमार सावन में शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे ऐतिहासिक गौरीशंकर मंदिर, बिहार के लिए की खास कामना
खुसरूपुर का बैकुंठ धाम स्थित गौरीशंकर मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। इसी क्रम में नीतीश कुमार ने रविवार को मंदिर में जलाभिषेक किया और बिहार के लिए कामना की.
Nitish Kumar : भगवान शिव की पूजा को लेकर आस्था और श्रद्धा के पावन महीने सावन पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने रविवार को पटना जिले के खुसरूपुर स्थित ऐतिहासिक बैकुंठ धाम के गौरीशंकर मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। नीतीश कुमार के मंदिर पहुंचने पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी उत्साह देखने को मिला। पूजा-अर्चना के दौरान बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी और उपनेता ललन कुमार सर्राफ भी मौजूद रहे।
सावन में उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
खुसरूपुर का बैकुंठ धाम स्थित गौरीशंकर मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। सावन के दौरान यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। आसपास के क्षेत्रों के अलावा पटना, फतुहा, बख्तियारपुर और बाढ़ समेत कई इलाकों से भक्त यहां आते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार सावन में यहां पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इस प्राचीन मंदिर को गौरीशंकर बैकुंठधाम के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी मान्यताएं इसे विशेष बनाती हैं। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस स्थान का उल्लेख धार्मिक आख्यानों में भी मिलता है और इसे प्राचीन समय में ‘बैकुंठ वन’ से जोड़ा जाता है।
भगवान राम और जरासंध से जुड़ी हैं मान्यताएं
मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में भगवान राम का प्रसंग भी शामिल है। स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार, लंका में रावण का वध करने के बाद भगवान राम पर लगे ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति के लिए उन्होंने बैकुंठ वन स्थित गौरीशंकर मंदिर में भगवान शिव की पूजा की थी। हालांकि यह धार्मिक मान्यता है, इसका उल्लेख स्थानीय परंपराओं और प्रकाशित धार्मिक सामग्री में मिलता है।
एक अन्य मान्यता इस मंदिर को महाभारत काल के मगध नरेश जरासंध से जोड़ती है। कहा जाता है कि जरासंध भगवान शिव के बड़े भक्त थे और राजगृह से यहां आकर नियमित रूप से पूजा करते थे। धार्मिक कथाओं में यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव की कृपा के कारण ही जरासंध को पराजित करना कठिन माना जाता था।
मंदिर की प्राचीनता और इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के कारण सावन के दौरान यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। श्रद्धालु गंगा जल लेकर पहुंचते हैं और भगवान गौरीशंकर का जलाभिषेक कर परिवार तथा समाज की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।
अभिजीत की रिपोर्ट