Noida violence: नोएडा हिंसा केस में बड़ा एक्शन! मास्टरमाइंड आदित्य आनंद गिरफ्त में, जानें बिहार से क्या है कनेक्शन?

Noida violence: नोएडा श्रमिक आंदोलन हिंसा में मुख्य आरोपी आदित्य आनंद गिरफ्तार कर लिया गया है। आदित्य आनंद ने इस पूरे घटनाक्रम की योजना डिजिटल माध्यम और गुप्त बैठकों के जरिए तैयार की थी।

नोएडा हिंसा केस में बड़ा एक्शन!- फोटो : social media

Noida violence: नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। नोएडा पुलिस और यूपी एसटीएफ ने इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आदित्य आनंद इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता था और उसने ही प्रदर्शन को भड़काने और उसे हिंसक बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। वह मूल रूप से बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर का रहने वाला है।

आदित्य आनंद की उम्र करीब 28 साल है और वह हाजीपुर के छोटी मढैया मोहल्ला निवासी अमित कुमार का बेटा है। वह फिलहाल नोएडा के सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार में रह रहा था। उसने अपनी पढ़ाई वैशाली के आरआर इंटर कॉलेज से 12वीं तक की और बाद में देसरी में भी पढ़ाई की। साल 2013 में वह पटना चला गया और आगे की पढ़ाई की। साल 2020 में उसने एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक किया। पढ़ाई के बाद उसे कैंपस प्लेसमेंट के जरिए एक निजी कंपनी में नौकरी मिली और वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने लगा। बाद में वह मजदूर बिगुल संगठन से जुड़ गया।

आदित्य आनंद पर एक लाख रुपये का इनाम 

पुलिस ने बताया कि इस मामले में आदित्य आनंद पर एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था। उसके दो अन्य साथी रूपेश रॉय और मनीषा चौहान को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। मनीषा गोपालगंज की रहने वाली है और रूपेश छपरा का निवासी है। यूपी एसटीएफ के अनुसार, 13 अप्रैल को हुई हिंसा से पहले 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच आदित्य आनंद ने कई लोगों के साथ बैठक की थी। इन बैठकों में आंदोलन को किस तरह से उग्र बनाना है, इसकी योजना बनाई गई थी। इसके बाद प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काई गई। पुलिस का कहना है कि आदित्य आनंद ने श्रमिकों के बीच भाषण भी दिया था और उसके फोटो और वीडियो सामने आने के बाद ही उसका नाम जांच में आया।

नोएडा में क्यों शुरू हुआ आंदोलन

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में यह आंदोलन शुरू में वेतन बढ़ाने, छंटनी रोकने और काम की स्थिति सुधारने की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह अचानक हिंसक हो गया। उपद्रवियों ने कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की और वाहनों में आग लगा दी, जिससे इलाके में काफी नुकसान हुआ और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे। पुलिस का यह भी कहना है कि आदित्य आनंद ने इस पूरे घटनाक्रम की योजना डिजिटल माध्यम और गुप्त बैठकों के जरिए तैयार की थी। तकनीकी निगरानी की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाया गया और उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया गया।