Railway News: अब 4 घंटे में पहुंचे पटना से दिल्ली, बिहार को मिलेगी नई रफ्तार, जानिए कहाँ-कहाँ रुकेगी ट्रेन
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Railway News: बिहार में कारोबार, रोजगार और यातायात को केंद्रीय बजट के प्रावधानों से नई गति मिलने की उम्मीद है। हाईस्पीड रेल कॉरिडोर और राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास से राज्य की कनेक्टिविटी देश के बड़े शहरों से और मजबूत होगी। बजट में घोषित सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर में दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं, जिससे बिहार सीधे दिल्ली और पश्चिम बंगाल से जुड़ जाएगा।
पटना से दिल्ली का सफर सिर्फ 4 घंटे में
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के बन जाने के बाद पटना से दिल्ली तक का सफर महज चार घंटे में पूरा किया जा सकेगा। फिलहाल राजधानी एक्सप्रेस से यह दूरी तय करने में 12 से 13 घंटे का समय लगता है। बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके जरिए दिल्ली से वाराणसी की दूरी लगभग 3 घंटे 50 मिनट और वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक की दूरी करीब 2 घंटे 55 मिनट में तय की जा सकेगी।
एलिवेटेड रेल लाइन पर चलेगी बुलेट ट्रेन
दिल्ली-वाराणसी (756 किमी) और वाराणसी-सिलीगुड़ी (744 किमी) के बीच हाईस्पीड रेल के लिए एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। पहले दिल्ली-पटना-हावड़ा के बीच दो चरणों में हाईस्पीड ट्रेन चलाने की योजना थी, लेकिन अब वाराणसी से सिलीगुड़ी तक अलग हाईस्पीड कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया गया है। बिहार से अगले सात वर्षों में बुलेट ट्रेन गुजरने की संभावना जताई जा रही है।
बिहार में पांच हाईस्पीड रेल स्टेशन प्रस्तावित
सिलीगुड़ी-वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर के तहत बिहार में पांच स्टेशन प्रस्तावित हैं। संभावित स्टेशन में बक्सर, पटना, बेगूसराय, कटिहार और किशनगंज शामिल है। किशनगंज के बाद अंतिम स्टेशन सिलीगुड़ी होगा। पूर्व में कराए गए सर्वे में विशेषज्ञों ने पटना के पास बिहटा क्षेत्र में स्टेशन बनाने का सुझाव दिया है।
कॉरिडोर का प्रस्तावित मार्ग
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर- दिल्ली, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ और वाराणसी
वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर- वाराणसी → बक्सर → आरा → पटना → मोकामा → हाथीदह → बेगूसराय → महेशखूंट → कटिहार → किशनगंज → सिलीगुड़ी
छह लाख करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च
करीब 1500 किलोमीटर लंबे दोनों हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सबसे अधिक खर्च जमीन अधिग्रहण और एलिवेटेड ट्रैक निर्माण पर होगा। स्टेशन निर्माण के लिए बड़े भूखंडों का अधिग्रहण किया जाएगा। तुलना करें तो मुंबई-अहमदाबाद के 508 किमी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर 86 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। बुलेट ट्रेन स्टेशन मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर विकसित किए जाएंगे।