Bihar News : अनिश्चितकालीन हड़ताल के 42 वें दिन भी डटे रहे पंचायत सचिव, विभाग के दावों पर उठाए सवाल

Bihar News : पटना में बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ का धरना चौथे दिन भी जारी रहा. इस दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार और पंचायती राज विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की......पढ़िए आगे

चौथे दिन भी जारी रहा धरना - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ की ओर से आहूत महाधरना के चौथे दिन और अनिश्चितकालीन हड़ताल के 42वें दिन भी तमाम पंचायत सचिव पटना के धरना स्थल पर अपनी मांगों के समर्थन में मजबूती से डटे रहे। इस दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार और पंचायती राज विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की । धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष विरेंद्र कुमार ने विभाग के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि पंचायती राज विभाग द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि संघ की सभी पांच सूत्री मांगें मान ली गई हैं। इस पर राज्य के तमाम पंचायत सचिवों का स्पष्ट कहना है कि यदि विभाग ने सचमुच मांगें स्वीकार कर ली हैं, तो इस संबंध में अब तक आधिकारिक पत्र (अधिसूचना) जारी करने में विलंब क्यों किया जा रहा है?  

2005 पंचायत सचिवों के तबादला आदेश में देरी पर 'सेवांजलि' ने जताई नाराजगी

महाधरना में एकजुटता प्रकट करने पहुँचे बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (सेवांजलि) के महामंत्री विकास कुमार ने भी धारणार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने विभाग की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जब स्थानांतरण (तबादला) संबंधी विनियमावली पहले ही तैयार हो चुकी है और उसके तहत बीते 9 फरवरी 2026 को 243 पंचायत सचिवों का स्थानांतरण पत्र जारी भी किया जा चुका है, तो फिर शेष बचे 2005 पंचायत सचिवों का स्थानांतरण आदेश पत्र निर्गत करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है? उन्होंने सरकार की इस ढुलमुल नीति को कर्मचारियों के साथ हठधर्मिता करार दिया ।  

मुख्य सचिव से हस्तक्षेप की मांग, 27 विभागों का कामकाज पूरी तरह ठप

कर्मचारी नेता विकास कुमार ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि मुख्य सचिव राज्य की जनता और विकास कार्यों के हित में खुद पहल करें । वे पंचायती राज विभाग द्वारा प्रायोजित इस अनिश्चितकालीन हड़ताल की उच्च स्तरीय समीक्षा करें और संघ की पांच सूत्री मांगों की स्वीकृति से संबंधित आधिकारिक पत्र जारी करवाएं । उन्होंने सचेत किया कि इस हड़ताल के कारण ग्रामीण स्तर पर सरकार के करीब 27 विभागों के अति-महत्वपूर्ण कार्य और सहयोग शिविर पूरी तरह बाधित हैं, जिन्हें त्वरित गति से चालू करना राज्य हित में बेहद जरूरी है। 

'निलंबन मंजूर, लेकिन बिना पत्र जारी हुए खत्म नहीं होगी हड़ताल' — कर्मचारी नेता

धरना स्थल पर मौजूद अन्य प्रमुख नेताओं, जिनमें ललन कुमार साह, शंभूशरण सिंह, गौरव प्रधान, इंद्रदेव यादव, वीरबल कुमार, विजेंद्र कुमार, संजय कुमार और सूचित कुमार शामिल थे, ने भी सभा को संबोधित किया । इन सभी नेताओं ने एक सुर में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि पंचायत सचिव अब किसी भी खोखले आश्वासन के झांसे में आने वाले नहीं हैं । उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक पंचायती राज विभाग मांगों की स्वीकृति से संबंधित आधिकारिक पत्र जारी नहीं करता, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल और आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। इसके लिए चाहे राज्य सरकार तमाम पंचायत सचिवों को सस्पेंड (निलंबित) ही क्यों न कर दे, वे पीछे नहीं हटेंगे ।