सावधान! गूगल से नंबर निकालना पड़ सकता है भारी, पटना के कारोबारी ने की ₹5 की पेमेंट और कट गए ₹19.76 लाख
पटना के जक्कनपुर में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोज रहे एक कारोबारी का मोबाइल फर्जी APK फाइल के जरिए हैक कर लिया गया। अपराधियों ने 18 बार में उनके 3 खातों से ₹19.76 लाख उड़ा लिए।
राजधानी पटना के जक्कनपुर थाना क्षेत्र के मीठापुर बी एरिया में साइबर अपराधियों ने एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। यहाँ रहने वाले एक कारोबारी गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजने के चक्कर में शातिर ठगों के जाल में फंस गए। साइबर अपराधियों ने चालाकी से गूगल पर एक नामचीन डॉक्टर का फर्जी नंबर अपलोड कर रखा था। इस नंबर पर संपर्क करने के बाद ठगों ने कारोबारी को झांसा दिया और उनके मोबाइल को हैक कर तीन अलग-अलग बैंक खातों से कुल ₹19.76 लाख उड़ा लिए।
₹5 के ऑनलाइन भुगतान के नाम पर डाउनलोड कराई फर्जी APK फाइल
मूल रूप से मध्य प्रदेश (भोपाल) के रहने वाले पीड़ित कारोबारी राजेश कुमार की मां के कंधे में गंभीर दर्द था। उनके इलाज के लिए राजेश ने गूगल पर शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. आरएन सिंह का नंबर सर्च किया। जब उन्होंने उस फर्जी नंबर पर कॉल किया, तो सामने वाले ने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट पक्का करने के नाम पर महज ₹5 ऑनलाइन जमा करने को कहा। इसके बाद ठगों ने एक लिंक भेजा और उस लिंक के जरिए एक एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करवा दी। फाइल डाउनलोड होते ही कारोबारी का मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया।
मां के इलाज के दौरान ICU के बाहर 18 बार में साफ किए खाते
मोबाइल का पूरा एक्सेस मिलते ही साइबर अपराधियों ने बैंक खातों में सेंधमारी शुरू कर दी। इधर राजेश अपनी मां को लेकर कंकड़बाग स्थित डॉक्टर के क्लीनिक पहुंचे, जहाँ गंभीर स्थिति को देखते हुए मां को आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया। राजेश मां की देखभाल और इलाज की औपचारिकता में व्यस्त रहे, जिसका फायदा उठाकर हैकर्स ने 18 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए उनके खातों से ₹19.76 लाख निकाल लिए। व्यस्तता के कारण पीड़ित को समय पर बैंक से पैसे कटने के मैसेज का पता ही नहीं चल सका।
साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज, पुलिस कर रही आरोपियों की तलाश
इलेक्ट्रिक उपकरण फैब्रिकेशन का बिजनेस करने वाले राजेश कुमार को जब इस भारी-भरकम ठगी का अहसास हुआ, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत पटना साइबर क्राइम थाने में मामले की लिखित शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। साइबर थाना पुलिस अब उन बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स को ट्रैक कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। साथ ही, गूगल पर डाले गए उस फर्जी नंबर की लोकेशन और आईपी एड्रेस के जरिए अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।