पटना को लटकते तारों से मिलेगी मुक्ति,, बिछेगा भूमिगत केबल का जाल, नए स्मार्ट प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 653 करोड़ रुपये की नई योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत शहर के विभिन्न अंचलों में भूमिगत केबलिंग और अत्याधुनिक 'स्काडा' (SCADA) सिस्टम लागू किया जाएगा।
Patna - आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत पटना शहर (पेसू) के कुल 13 प्रमंडलों में से 09 प्रमंडलों में बड़े पैमाने पर सुधार कार्य किए जाएंगे। इसके लिए 576.74 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके जरिए इन क्षेत्रों में भूमिगत केबलिंग (Underground Cabling) और स्काडा-डीएमएस (SCADA-DMS) के कार्य किए जाएंगे। इस नई व्यवस्था से न केवल बिजली चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि तकनीकी खराबी के कारण होने वाले पावर कट की समस्या भी लगभग समाप्त हो जाएगी।
केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए वित्तीय पोषण 60:40 के अनुपात में तय किया गया है। कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा यानी 346.04 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से अनुदान के रूप में प्राप्त होगा। शेष 40 प्रतिशत राशि, जो 230.70 करोड़ रुपये है, राज्य सरकार द्वारा 'इक्विटी' के रूप में साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) को उपलब्ध कराई जाएगी।
इन 04 प्रमंडलों को भी मिलेगा लाभ
योजना का विस्तार करते हुए पेसू के शेष 04 प्रमंडलों— दानापुर, खगौल, गुलजारबाग और कंकड़बाग-2 को भी इसमें शामिल किया गया है। इन प्रमंडलों में स्काडा-डीएमएस के कार्यान्वयन के लिए राज्य योजना से अलग से 76.26 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस अतिरिक्त निवेश के साथ अब पटना के सभी प्रमुख इलाकों में बिजली वितरण की निगरानी कंप्यूटर आधारित स्मार्ट सिस्टम से हो सकेगी।
क्या है स्काडा (SCADA) सिस्टम?
स्काडा-डीएमएस एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिससे बिजली ग्रिड की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है। यदि किसी क्षेत्र में फॉल्ट होता है, तो सिस्टम तुरंत उसकी सटीक लोकेशन बता देगा, जिससे घंटों तक रहने वाला ब्लैकआउट मिनटों में ठीक हो सकेगा। साथ ही, भूमिगत केबलिंग होने से शहर की सड़कों पर लटकते तारों के जाल से मुक्ति मिलेगी और तेज आंधी-बारिश के दौरान होने वाले खतरों में भी कमी आएगी।