पहले वकालत करियर का अंतिम विकल्प था, अब यह मेधावी छात्रों की पहली पसंद, पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने युवा वकीलों को दी सीख
चीफ जस्टिस ने युवा अधिवक्ताओं को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए कहा कि अब वकालत मेधावी छात्रों की पहली पसंद बन गई है। उन्होंने सलाह दी कि सफलता के लिए गलत तथ्यों का सहारा न लें, क्योंकि गलत तथ्यों पर जीता गया केस भविष्य में करियर को भारी नुकसान पहुँच
Patna - पटना हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू का अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत एक प्रसिद्ध म्यूजिशियन द्वारा प्रस्तुत संगीत से हुई। इस समारोह में पटना हाई कोर्ट के अन्य जज, राज्य सरकार के महाधिवक्ता पी.के. शाही सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर चीफ जस्टिस ने कहा कि पटना हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन देश का सबसे बड़ा एसोसिएशन है, जिसके लगभग 10 हजार सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि वे अधिवक्ताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करेंगे। अपने संबोधन में चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें हिंदी में बोलने का सौभाग्य मिला है।
उन्होंने बताया कि बिहार आने के बाद एक महीने में उन्होंने जितनी हिंदी सीखी, उतनी पहले कभी नहीं सीख पाए थे। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में हिंदी के प्रयोग को लेकर जो आशंकाएं जताई गई थीं, वे निराधार साबित हुईं। युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले वकालत को करियर का अंतिम विकल्प माना जाता था, लेकिन अब यह मेधावी छात्रों की पहली पसंद बन गई है, जिससे जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उन्होंने सलाह दी कि युवा अधिवक्ता ईमानदारी से मामलों को प्रस्तुत करें और सीनियर अधिवक्ताओं के साथ बैठकर काम करें, तभी उनका भरोसा हासिल होगा।
चीफ जस्टिस ने कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर केस जीतना भविष्य में करियर को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने ऑनलाइन और पुस्तकीय अध्ययन को समान रूप से आवश्यक बताया तथा ट्रायल कोर्ट में प्रैक्टिस पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि पटना हाई कोर्ट में लंबित जमानत याचिकाओं में तेजी से कमी आई है और पुरानी अपीलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि अधिवक्तागण की न्यायपालिका की गरिमा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।