Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने 32 साल पुराने हत्या के मामले में दिया बड़ा फैसला, सबूतों के अभाव में आरोपी को किया बरी, उम्रकैद की सजा किया रद्द

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने 32 साल पुराने एक चर्चित हत्या के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी डोरिक साव को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है.......पढ़िए आगे

हत्याकांड के आरोपी को राहत - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने 32 साल पुराने हत्या के मामले में आरोपी डोरिक साव को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने जमुई की फास्ट ट्रैक अदालत द्वारा सुनायी गयी दोषसिद्धि और आजीवन कठोर कारावास की सजा को रद्द कर दिया। जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा और जस्टिस आलोक कुमार की खंडपीठ ने आपराधिक अपील (डीबी) संख्या 266/2004 पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

जमुई के झाझा थाना क्षेत्र में 5 अगस्त,1993 को चानो साव की हत्या कर दी गयी थी। मृतक के पुत्र रामदेव साव के फर्दबयान के आधार पर झाझा थाना कांड संख्या 121/1993 दर्ज हुआ था। ये आरोप था कि चानो साव आरोपी डोरिक साव के साथ पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर में बीड़ी का काम करने गये थे। उनके वापस नहीं लौटने पर तलाश के दौरान भदारिया जंगल के पास सड़क किनारे उनका शव मिला था। शव के गले, पेट और सिर पर गंभीर चोट के निशान थे। हाईकोर्ट ने पाया कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। अभियोजन मृतक और आरोपी के अंतिम बार साथ देखे जाने की बात भी विश्वसनीय तरीके से साबित नहीं कर सका। जिस चचेरे भाई करू साव के हवाले से दोनों को नरगंज स्टेशन पर साथ देखे जाने की बात कही गयी थी, उसने अपनी गवाही में इसका उल्लेख ही नहीं किया। कोर्ट ने इसे सुनी-सुनाई बात माना।

बीड़ी के काम को लेकर विवाद को हत्या का मकसद बताया गया था, लेकिन संबंधित बीड़ी कंपनी के मालिक से पूछताछ नहीं की गयी और न ही उसे गवाह बनाया गया। जांच अधिकारी को भी अदालत में पेश नहीं किया गया, जिससे बचाव पक्ष को उससे जिरह का अवसर नहीं मिला। गवाहों के बयानों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास मिले। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामले में घटनाओं की पूरी श्रृंखला ऐसी होनी चाहिए, जिससे आरोपी के अपराध के अलावा किसी अन्य संभावना की गुंजाइश न रहे। 

इस मामलें में साक्ष्यों की कड़ी अधूरी और कमजोर है। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।इसके साथ ही हाईकोर्ट ने डोरिक साव की अपील स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी। गौरतलब है कि आरोपी पहले से जमानत पर थे, इसलिए उनके जमानत बांड रद्द कर दिये गये।कोर्ट ने मित्र स्मृति सिंह को 10 हजार रुपये पारिश्रमिक देने का भी निर्देश दिया गया।