बिहार के आम उत्पादकों की उपेक्षा पर पटना हाईकोर्ट सख्त: किसानों को क्या सिखाया? हलफनामा दें सरकार, 20 मार्च को अगली सुनवाई
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के आम उत्पादकों की बदहाली पर सरकार से मांगा जवाब। निर्यात और प्रशिक्षण पर 20 मार्च तक हलफनामा दायर करने का आदेश। किसानों को सही कीमत न मिलने पर जताई नाराजगी।
Patna - : बिहार में आम की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को सही कीमत न मिलने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात की व्यवस्था न होने पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई में हलफनामा दायर कर बताए कि किसानों के प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के लिए अब तक जमीन पर क्या काम हुआ है।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, 20 मार्च तक की मोहलत
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के आम उत्पादकों को उनके फसल की सही कीमत न मिलने और विदेशों में निर्यात के लिए 'इंफ्रास्ट्रक्चर' के अभाव पर गहरी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने अधिवक्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने अब सरकार को अगली सुनवाई तक किसानों के प्रशिक्षण के संबंध में की गई ठोस कार्रवाइयों पर विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है।
पिछली रिपोर्ट से असंतुष्ट दिखा न्यायालय
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विशेष रूप से भागलपुर और पश्चिम चम्पारण जिलों में आम के बेहतर प्रबंधन और निर्यात के लिए किए जा रहे कार्यों का ब्यौरा मांगा था। हालांकि, सरकार की ओर से वैज्ञानिक प्रबंधन और पैकेजिंग की व्यवस्था करने की बात कही गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस वर्ष किसानों को दिए गए वास्तविक प्रशिक्षण और विकसित किए गए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का स्पष्ट डेटा अगली तारीख, 20 मार्च 2026 तक पेश करने को कहा है।
"बिहार के आमों की दुनिया में मांग, पर किसानों को लागत भी नहीं"
याचिकाकर्ता अधिवक्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि बिहार में उत्तम श्रेणी के आमों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी भारी मांग है, लेकिन राज्य सरकार की उदासीनता और उपेक्षा के कारण किसानों को उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि अगर सरकार आधारभूत संरचना (सॉर्टिंग, ग्रेडिंग और कोल्ड स्टोरेज) विकसित करे, तो न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि राज्य विदेशी मुद्रा भी अर्जित कर सकेगा।
फरवरी 2023 से लंबित सवालों पर सरकार मौन
अधिवक्ता डॉ. चंद्र ने कोर्ट को यह भी बताया कि उन्होंने फरवरी 2023 में ही कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी थी। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से उन महत्वपूर्ण सवालों पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसी उपेक्षा के कारण राज्य के आम उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि पड़ोसी राज्य अपने फल निर्यात से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।
केंद्र और राज्य की सहायता से ही संभव है बदलाव
सुनवाई के दौरान यह बात प्रमुखता से उठी कि जब तक केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सहायता नहीं करेंगे, तब तक बिहार के आमों की वैश्विक ब्रांडिंग नहीं हो पाएगी। सरकार की मदद से ही किसान अच्छी श्रेणी का उत्पादन कर सकेंगे और उन्नत पैकेजिंग तकनीक से आमों को विदेशों में भेजा जा सकेगा। यह न केवल कृषि बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकता है।
अगली सुनवाई पर टिकीं प्रदेश के किसानों की नजरें
इस मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च 2026 को तय की गई है। बिहार के लाखों आम उत्पादक किसान इस उम्मीद में हैं कि हाईकोर्ट के दखल के बाद सरकार की नींद टूटेगी और इस सीजन में उनके फलों को विदेशों के बाजार तक पहुंचने का रास्ता साफ होगा। कोर्ट का सख्त रुख यह संकेत दे रहा है कि अब कागजी जवाबों से काम नहीं चलेगा, सरकार को जमीनी सच्चाई बतानी होगी।