बायो-मेडिकल वेस्ट पर पटना हाईकोर्ट सख्त: सभी DM से मांगी रिपोर्ट, अस्पतालों पर होगी कार्रवाई

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के अस्पतालों में बायो-मेडिकल वेस्ट के गलत निस्तारण पर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने सभी जिलाधिकारियों और प्रदूषण बोर्ड से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को।

Patna - : बिहार के सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट (अस्पतालों का कचरा) के जानलेवा खतरे को लेकर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) से जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों के कचरे का सही ढंग से निस्तारण न होना नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है और इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सभी जिलों के डीएम को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

कोर्ट ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से अपने-अपने जिलों में बायो-मेडिकल वेस्ट के संबंध में की गई कार्रवाइयों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। अदालत ने राज्य सरकार से भी यह बताने को कहा है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में इस कचरे को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए वर्तमान में क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रदूषण बोर्ड के रडार पर लापरवाह अस्पताल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने जानना चाहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कितने अस्पतालों को अब तक नोटिस दिया गया है और उनके खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है। बोर्ड को आदेश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई में उन सभी अस्पतालों का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करें जो कचरे का निस्तारण सही ढंग से नहीं कर रहे हैं।

जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडराता खतरा

याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने अदालत को बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में छोटे-बड़े अस्पताल संचालित हैं, लेकिन अधिकतर अस्पताल मेडिकल वेस्ट का निस्तारण मनमाने ढंग से कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि खुले में फेंका गया अस्पतालों का कचरा न केवल वातावरण और वायु को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि अस्पतालों के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका घातक और विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

20 अप्रैल को होगी अगली निर्णायक सुनवाई

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को अपनी रिपोर्ट तैयार करने का समय दिया है। बायो-मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन और दोषियों पर कार्रवाई की अगली समीक्षा 20 अप्रैल 2026 को की जाएगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट संतोषजनक न होने पर कोर्ट लापरवाह अधिकारियों और अस्पताल संचालकों पर भारी जुर्माना या अन्य कठोर कार्रवाई का आदेश दे सकता है।