जमुई पुलिस की 'गुंडागर्दी' पर हाईकोर्ट का हथौड़ा: SP और SHO के खिलाफ कार्रवाई का आदेश, DGP को लगी फटकार! जानें पूराम मामला
पटना हाईकोर्ट ने जमुई एसपी और एसएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। 7 साल से कम सजा वाले केस में अवैध गिरफ्तारी पर कोर्ट ने डीजीपी को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
Patna - पटना हाईकोर्ट ने सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में मनमानी गिरफ्तारी को लेकर बिहार पुलिस पर कड़ा शिकंजा कसा है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकल पीठ ने जमुई के पुलिस अधीक्षक (SP), एसडीपीओ (SDPO) और तत्कालीन थाना अध्यक्ष (SHO) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक संबंधित एसएचओ को किसी भी केस के अनुसंधान (Investigation) की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के 'अर्निश कुमार' फैसले की अनदेखी पर नोटिस
हाईकोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन जांच अधिकारी और एसएचओ को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत 'सिविल अवमानना' का दोषी मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आठ सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अर्निश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में स्पष्ट गाइडलाइन दी थी कि 7 साल से कम सजा वाले अपराधों में सीधे गिरफ्तारी के बजाय CRPC की धारा 41-ए के तहत नोटिस दिया जाना चाहिए। जमुई पुलिस द्वारा इस नियम की अनदेखी को कोर्ट ने न्यायपालिका के आदेशों का खुला उल्लंघन माना है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जमुई थाना में 20 जुलाई, 2020 को दर्ज प्राथमिकी संख्या 379/2020 से जुड़ा है। कुमार दुष्यंत नामक व्यक्ति पर फेसबुक अकाउंट हैक कर आपत्तिजनक संदेश पोस्ट करने का आरोप था, जिसमें IPC की धारा 420 और IT एक्ट की धारा 66(C)(D) लगाई गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि मामले को गंभीर बनाने के लिए धारा 420 गलत तरीके से जोड़ी गई। जब वह जांच अधिकारी से मिलने गए, तो उन पर वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में गिरफ्तारी की बात कही गई और बाद में उन्हें अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया।
पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
याचिकाकर्ता के अनुसार, 20 नवंबर 2020 को जब वे एक सेमिनार से लौट रहे थे, तब सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें रास्ते में रोककर उनका मोबाइल छीन लिया और थाने ले गए। आरोप है कि थाने में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उनके पिता को भी झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर भगा दिया गया। हद तो तब हो गई जब उन्हें हथकड़ी लगाकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस के इस 'दुर्भावनापूर्ण कृत्य' और यांत्रिक तरीके से की गई गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करार दिया है।
अगली सुनवाई 19 जून को
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने गिरफ्तारी को जायज ठहराने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारियों ने कानून और सर्वोच्च अदालत के निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 जून 2026 को तय की गई है। तब तक एसएचओ पर अनुसंधान कार्य करने पर रोक बरकरार रहेगी। इस आदेश से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।