पटना हाईकोर्ट की बड़ी फटकार : बिना साक्ष्य कर्मचारी को बर्खास्त करना गलत, 10 साल बाद लिपिक को मिली बहाली और वेतन की जीत
पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया के अपर लिपिक प्रदीप कुमार पंडित की बर्खास्तगी रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि बिना गवाह और सबूत के केवल FIR के आधार पर सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है।
Patna - पटना हाईकोर्ट ने विभागीय जांच की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए बर्खास्त लिपिक को बहाल करने का आदेश दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी की एकलपीठ ने सिविल रिट याचिका संख्या 1051/2025 पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
ये मामला गोघरी (खगड़िया) अनुमंडल कार्यालय में कार्यरत अपर लिपिक प्रदीप कुमार पंडित से जुड़ा है। वर्ष 2015 में कथित रिश्वत प्रकरण में विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उनके खिलाफ सतर्कता थाना कांड संख्या 33/2014 दर्ज हुआ था। हालांकि आपराधिक मुकदमे में 4 सितंबर, 2025 को उन्हें साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजीव नयन ने दलील दी कि विभागीय जांच में न तो कोई गवाह पेश किया गया और न ही आरोपों को विधिसम्मत ढंग से सिद्ध किया गया। केवल प्राथमिकी दर्ज होने और गिरफ्तारी के आधार पर उन्हें दोषी ठहराकर सेवा से हटा दिया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्रवाई में आरोपों को ‘संभावनाओं के संतुलन’ के आधार पर सिद्ध करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए न्यूनतम साक्ष्य और गवाहों की परीक्षा जरूरी है। बिना साक्ष्य के निष्कर्ष निकालना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्ति आयु पार नहीं कर चुके हैं ,तो तीन माह के भीतर पुनर्बहाल कर सभी वेतन व अन्य लाभ दिए जाएं।