Patna High Court:आभूषण कारोबारी फर्म को पटना हाईकोर्ट से लगा तगड़ा झटका, इनकम टैक्स री-असेसमेंट केस में ऐसे बदला पूरा मामला

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने प्रसिद्ध आभूषण कारोबारी फर्म को आयकर पुनर्मूल्यांकन मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है।

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने प्रसिद्ध आभूषण कारोबारी फर्म रत्नालया ज्वैलर्स को आयकर पुनर्मूल्यांकन मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने फर्म की ओर से दाखिल रिट याचिका खारिज करते हुए आयकर विभाग की ओर से आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को वैध माना है।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने की। फर्म ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से संबंधित आयकर पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि विभाग के पास दोबारा आकलन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त और प्रासंगिक सामग्री मौजूद नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि फर्म के पास एक दूसरा PAN कार्ड भी मौजूद था। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि इस दूसरे PAN के तहत फर्म की ओर से आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया गया था।

हाईकोर्ट ने इसी तथ्य को पुनर्मूल्यांकन की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधारों में से एक माना। अदालत ने कहा कि जब दूसरे PAN पर रिटर्न दाखिल नहीं किए जाने का तथ्य स्थापित है, तो आयकर अधिकारी का यह विश्वास कि कर योग्य आय का कुछ हिस्सा आकलन से छूट गया हो सकता है, प्रथम दृष्टया निराधार या मनमाना नहीं कहा जा सकता।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि रिट क्षेत्राधिकार में हाईकोर्ट आयकर अधिकारी के पास उपलब्ध सामग्री की पर्याप्तता या उसकी गहराई से जांच नहीं कर सकती। अदालत का दखल उस स्तर पर होता है, जहां कार्यवाही शुरू करने के लिए कोई प्राथमिक आधार ही मौजूद न हो या उपलब्ध जानकारी पूरी तरह अप्रासंगिक अथवा अस्पष्ट हो।

हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में फर्म द्वारा दूसरे PAN पर रिटर्न दाखिल नहीं किया जाना एक स्थापित तथ्य है। ऐसे में आयकर अधिकारी का यह विश्वास कि कर योग्य आय का आकलन छूट सकता है, प्रथम दृष्टया ऐसा निष्कर्ष नहीं है जिसे बिना आधार का माना जाए।

हाईकोर्ट द्वारा रिट याचिका खारिज किए जाने के बाद रत्नालया ज्वैलर्स से संबंधित आयकर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया आगे जारी रह सकेगी। विभाग दूसरे PAN और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन समेत उन पहलुओं की जांच कर सकता है, जिनके आधार पर पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही शुरू की गई है।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट का फैसला इस स्तर पर पुनर्मूल्यांकन नोटिस की वैधता से जुड़ा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि फर्म के खिलाफ कर चोरी या किसी अन्य वित्तीय अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष अदालत ने दे दिया है। अब संबंधित प्रक्रिया में आयकर विभाग तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।