पटना में वेंडिंग जोन और न्यू मार्केट का बदलेगा रूप, नगर निगम ला रहा ₹200 करोड़ का बांड, खुद चुकाना होगा कर्ज
पटना नगर निगम ला रहा है ₹200 करोड़ का म्यूनिसिपल बांड, खुद के राजस्व से चुकाना होगा कर्ज।पटना रेलवे स्टेशन के पास न्यू मार्केट का कायाकल्प और संगठित वेंडिंग जोन बनाने के लिए सरकार ने दी बांड की मंजूरी।NSE पर लिस्ट होगा बांड। भुगतान के लिए निगम बनाएग
बिहार प्रदेश सरकार ने पटना नगर निगम को ₹200 करोड़ तक का म्यूनिसिपल बांड जारी करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल द्वारा तीन दिन पहले स्वीकृत इस प्रस्ताव के बाद, नगर विकास व आवास विभाग ने बांड से जुड़ी सख्त नियम और शर्तें तय करते हुए आदेश जारी कर दिया है। यह म्यूनिसिपल बांड 10 वर्ष की अवधि के लिए एक ही किश्त में जारी किया जाएगा और इसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध (लिस्ट) किया जाएगा, जिसमें बैंक, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड और अन्य संस्थागत निवेशक इलेक्ट्रॉनिक बोली प्रक्रिया के जरिए तय ब्याज दर पर निवेश कर सकेंगे।
भुगतान की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम की, सरकार नहीं लेगी लायबिलिटी
सरकार ने इस बांड को लेकर बेहद स्पष्ट वित्तीय नीति अपनाई है, जिसके तहत मूलधन और ब्याज के एक-एक रुपये के भुगतान की पूरी जिम्मेदारी खुद पटना नगर निगम की होगी। राज्य सरकार इस भुगतान की कोई लायबिलिटी (जिम्मेदारी) नहीं लेगी और नगर निगम को अपने ही राजस्व (राजस्व स्रोतों) से इस कर्ज को चुकाना होगा। बांड जारी होने के चार वर्ष बाद मूलधन की अदायगी शुरू होगी, जो कि अगले 10 वर्षों तक चलेगी, और इस पूरे कालखंड में निगम को कड़ा वित्तीय अनुशासन बनाए रखना होगा।
एस्क्रो और डीएसआरए खातों से सुरक्षित होगा निवेशकों का पैसा
निवेशकों के भुगतान में किसी भी प्रकार की चूक को रोकने के लिए नगर निगम को एस्क्रो खाता, इंटरेस्ट पेमेंट अकाउंट (IPA), सिंकिंग फंड और डेब्ट सर्विस रिजर्व अकाउंट (DSRA) जैसे विशेष खाते खोलने होंगे। नियमों के मुताबिक, सुरक्षा के तौर पर एक वर्ष के ब्याज के बराबर की राशि हमेशा DSRA में रिजर्व रखी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने यह शर्त भी अनिवार्य की है कि इस बांड के वित्तीय बोझ के कारण शहर की बुनियादी नागरिक सेवाओं—जैसे सफाई, पेयजल, सड़क और स्ट्रीट लाइट—के बजट पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ना चाहिए।
सेबी के नियमों का पालन और पारदर्शी ऑडिट प्रणाली
बांड को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने नगर निगम को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। इसके अंतर्गत निगम को मर्चेंट बैंकर, कानूनी सलाहकार, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी और डिबेंचर ट्रस्टी जैसी जरूरी स्वतंत्र एजेंसियों की नियुक्ति करनी होगी। साथ ही, बांड की अवधि के दौरान समय-समय पर नगर निगम को अपनी वित्तीय जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे।
इन महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर खर्च होगी राशि
बांड के जरिए जुटने वाली ₹200 करोड़ की इस भारी-भरकम राशि का उपयोग मुख्य रूप से पटना शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने में किया जाएगा, जिसके तहत मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
संगठित वेंडिंग जोन का विकास: शहर के दुकानदारों और वेंडर्स के लिए व्यवस्थित जोन बनाना।
न्यू मार्केट का पुनर्विकास: पटना रेलवे स्टेशन के पास स्थित ऐतिहासिक न्यू मार्केट का कायाकल्प।
अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं: यदि किसी कारणवश किसी प्रोजेक्ट में काम रुकता है, तो निगम को इस धनराशि को दूसरी आवश्यक विकास परियोजनाओं में ट्रांसफर करने का भी पूरा अधिकार होगा।