NEET छात्रा हत्याकांड: सबूतों से खिलवाड़ पर कोर्ट सख्त, पूर्व थानेदार को लगी फटकार; अब 28 को होगा इंसाफ का फैसला!
पटना में NEET छात्रा हत्याकांड मामले में नया मोड़: साक्ष्यों से छेड़छाड़ पर कोर्ट ने पुलिस को फटकारा, पूर्व थानेदार को लगी क्लास और मुख्य आरोपी की जमानत पर फैसला 28 तक टला।
Patna - : पटना के चर्चित NEET छात्रा हत्याकांड मामले में आज न्यायालय में गहमागहमी का माहौल रहा। शंभू गर्ल हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन जांच एजेंसियों की अधूरी पूछताछ और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों के बीच अदालत ने फैसला 28 तारीख तक के लिए टाल दिया है।
पूछताछ अधूरी, टल गई जमानत पर सुनवाई
न्यायालय ने आज मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 28 फरवरी मुकर्रर की है। इस स्थगन का मुख्य कारण यह रहा कि जांच एजेंसियां अब तक आरोपी मनीष रंजन से अपनी पूछताछ पूरी नहीं कर पाई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक पूछताछ का दौर मुकम्मल नहीं होता, जमानत पर विचार करना जल्दबाजी होगी।
पूर्व थानेदार रोशनी कुमारी को कोर्ट की कड़ी फटकार
सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद सख्त नजर आया। मामले में लापरवाही और जांच की कछुआ चाल को लेकर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। विशेष रूप से पूर्व थानेदार रोशनी कुमारी को न्यायालय में तलब किया गया था, जिन्हें जांच में शिथिलता बरतने के लिए जज की तीखी फटकार का सामना करना पड़ा।
साक्ष्यों से 'गंभीर छेड़छाड़' का सनसनीखेज आरोप
पीड़ित पक्ष के वकील S.K. पांडे ने मीडिया से मुखातिब होते हुए जांच प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संवेदनशील मामले में सबूतों के साथ बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की गई है। वकील ने कहा कि साक्ष्यों को नष्ट करना या उनसे छेड़छाड़ करना अपने आप में एक संगीन अपराध है, जिसने न्याय की राह को मुश्किल बना दिया है।
खाली हाथ एजेंसियां और जज की तल्ख टिप्पणी
अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि इतना समय बीत जाने के बाद भी जांच एजेंसियों के हाथ अब तक खाली हैं। कोर्ट में मौजूद दोनों जांच एजेंसियों के अधिकारियों को न्यायाधीश ने जमकर सुनाया और पूछा कि अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने क्यों नहीं आया। जांच की धीमी रफ्तार पर न्यायालय ने तीखी टिप्पणी करते हुए इसे न्याय में देरी बताया।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में पीड़ित परिवार
न्याय मिलने में हो रही देरी से पीड़ित परिवार का धैर्य जवाब दे रहा है। उनके कानूनी सलाहकार ने साफ कर दिया है कि अगर स्थानीय स्तर पर उन्हें इंसाफ नहीं मिलता है और जांच इसी तरह भटकती रही, तो वे न्याय की गुहार लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। परिवार का मानना है कि रसूखदार आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
28 तारीख: न्याय की अग्निपरीक्षा का दिन
अब सबकी निगाहें 28 तारीख पर टिकी हैं, जिसे इस हत्याकांड की जांच का 'टर्निंग पॉइंट' माना जा रहा है। क्या जांच एजेंसियां अगली सुनवाई तक कोई बड़ा खुलासा कर पाएंगी? या फिर साक्ष्यों की कमी का फायदा आरोपी को मिलेगा? पटना की जनता और पीड़ित परिवार अब केवल अदालत के अगले कदम के इंतजार में है।
रिपोर्ट- अनिल कुमार