रस्सी से घोंटा गला, बोरे में भरी लाश: बेवफा पत्नी और कातिल जीजा का खूनी खेल, पटना पुलिस ने चंद घंटों में किया 'द एंड'

पटना के मसौढ़ी में एक बहन अपने भाई विक्की की तलाश में दर-दर भटक रही थी, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस भाई को वह ढूंढ रही है, उसका 'डेथ वारंट' घर की दहलीज के भीतर ही लिखा जा चुका है। 17 फरवरी को जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो परतें ऐसी खुलीं कि रूह कांप

Patna - पटना के मसौढ़ी में एक बहन अपने भाई विक्की की तलाश में दर-दर भटक रही थी, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस भाई को वह ढूंढ रही है, उसका 'डेथ वारंट' घर की दहलीज के भीतर ही लिखा जा चुका है। 17 फरवरी को जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो परतें ऐसी खुलीं कि रूह कांप जाए। यह कोई साधारण गुमशुदगी नहीं, बल्कि अवैध संबंधों, संपत्ति के लालच और खौफनाक धोखे का एक ऐसा कॉकटेल था जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। 

अवैध संबंध और लालच में पति की हत्या

पटना पूर्वी एसपी परिचय कुमार के अनुसार, विक्की कुमार की हत्या की साजिश उसकी अपनी पत्नी और उसके जीजा सिद्धनाथ ने मिलकर रची थी। जांच में यह बात सामने आई कि विक्की की पत्नी का अपने जीजा सिद्धनाथ के साथ अवैध संबंध था। प्रेम प्रसंग में बाधा बनने और संपत्ति हड़पने की नीयत से दोनों ने मिलकर विक्की को रास्ते से हटाने का फैसला किया। सिद्धनाथ ने इस काम के लिए अपने दोस्त सोनू यादव को पैसों का लालच देकर शामिल किया। 

रस्सी से घोंटा गला, बोरे में बंद कर फेंकी लाश

पुलिस अनुसंधान में पता चला कि 11 फरवरी 2026 को आरोपियों ने प्लानिंग के तहत नायलॉन की रस्सी से विक्की का गला घोंट दिया। हत्या के बाद साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से शव को प्लास्टिक के बोरे में बंद किया गया और बाइक से ले जाकर महादेश्वर गांव की झाड़ियों में फेंक दिया गया। 17 फरवरी को विक्की की बहन ने अनहोनी की आशंका जताते हुए मसौढ़ी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। 

त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जीजा सिद्धनाथ और उसके दोस्त सोनू यादव को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और उनकी निशानदेही पर झाड़ियों से विक्की का शव बरामद कर लिया गया। मौके पर FSL टीम को बुलाकर साक्ष्य संकलित किए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

रिपोर्ट - अनिल कुमार