पॉक्सो कोर्ट का 'हथौड़ा': मासूम की जिंदगी बर्बाद करने वाले को 24 साल की जेल, साढ़े तीन लाख के जुर्माने से होगा हिसाब!

विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में त्वरित न्याय करते हुए मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने दोषी को 24 वर्ष के कड़े कारावास की सजा सुनाई है और पीड़िता के लिए सम्मानजनक मुआवजे की घोषणा की है।

Supaul - सुपौल जिले के भीमपुर थाना कांड संख्या 02/2021 में सुनवाई पूरी करते हुए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार दुबे की अदालत ने अररिया निवासी गुलाबचंद मुखिया को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को भादवि की धारा 376(3) और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत 24 वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 25,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे अदा न करने पर उसे 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 

अपहरण और बंधक बनाने की धाराओं में अतिरिक्त सजा

अदालत ने दुष्कर्म के अलावा अपहरण और गलत तरीके से बंधक बनाने के आरोपों को भी सही पाया। इसके लिए भादवि की धारा 365 (अपहरण) में 7 वर्ष, धारा 342 में 1 वर्ष और धारा 341 में 1 माह की सजा सुनाई गई है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। साथ ही, जेल में पहले से बिताई गई अवधि को सजा की कुल अवधि में समायोजित किया जाएगा। 

पीड़िता के लिए ₹3.5 लाख के मुआवजे का आदेश

न्यायालय ने पीड़िता को हुए शारीरिक और मानसिक आघात की भरपाई और उसके पुनर्वास के लिए 3.5 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है। यह राशि कानूनी प्रक्रियाओं के तहत पीड़िता को उपलब्ध कराई जाएगी। यह कदम भविष्य में पीड़िता के सम्मानजनक जीवन और सहायता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

8 गवाहों की गवाही के आधार पर सिद्ध हुआ दोष

इस मामले के ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने अदालत के समक्ष कुल 8 गवाहों को पेश किया, जिन्होंने आरोपी के खिलाफ गवाही दी। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता पंकज कुमार दास ने दलीलें दीं, लेकिन साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने 9 जनवरी 2026 को ही गुलाबचंद मुखिया को दोषी मान लिया था। 

समाज के लिए कड़ा संदेश और न्याय की जीत

सजा सुनाए जाने के बाद पूरे इलाके में न्यायपालिका के इस फैसले की सराहना हो रही है। यह फैसला समाज में महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध करने वाले अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। 24 साल की इस लंबी सजा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी अपराधी बच नहीं सकता।