गंगा सफाई के प्रयासों पर आई बड़ी रिपोर्ट, नहाने से पीने तक कैसा है गंगा का पानी, बड़ा खुलासा

केंद्र के अनुसार 2024-25 के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे किए गए बायो-मॉनिटरिंग से जल की गुणवत्ता “अच्छी” से “मध्यम” श्रेणी के बीच पाई गई

Pollution in Ganga- फोटो : news4nation

Ganga :  गंगा सफाई को लेकर हर वर्ष बड़ी रकम खर्च होने की बीच केंद्र सरकार ने दावा किया है कि गंगा नदी का पानी अब अधिकांश स्थानों पर नहाने के मानकों को पूरा कर रहा है और नदी में प्रदूषण का स्तर लगातार घट रहा है। यह जानकारी लोकसभा में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने एक लिखित जवाब में दिया है। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 (जनवरी से अगस्त) के मीडियन जल गुणवत्ता आंकड़ों के अनुसार गंगा का pH स्तर और घुलित ऑक्सीजन सभी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर नहाने के तय मानकों के अनुरूप पाया गया है।


उन्होंने कहा कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) गंगा नदी के पांच प्रमुख राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कुल 112 स्थानों पर जल गुणवत्ता की निगरानी करता है। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) के आधार पर गंगा का पानी उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में पूरी तरह नहाने योग्य पाया गया है। हालांकि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों कानपुर, रायबरेली और मिर्जापुर-गाजीपुर के बीच में स्थिति अपेक्षाकृत चिंताजनक बनी हुई है।


मंत्री ने बताया कि 2024-25 के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे किए गए बायो-मॉनिटरिंग से जल की गुणवत्ता “अच्छी” से “मध्यम” श्रेणी के बीच पाई गई, जो जलीय जीवन के लिए अनुकूल है।


नमामि गंगे का असर

गंगा की सफाई के लिए चलाए जा रहे नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत सीवेज ट्रीटमेंट, रिवर फ्रंट विकास, ई-फ्लो सुनिश्चित करना, ग्रामीण स्वच्छता, वनीकरण और जनभागीदारी जैसे कई कार्य किए गए हैं। फरवरी 2026 तक 43,030 करोड़ रुपये की लागत से 524 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनमें से 355 पूरी हो चुकी हैं। सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत 218 परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनकी कुल ट्रीटमेंट क्षमता 6,610 MLD है। इनमें से 4,050 MLD क्षमता वाले 138 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनकर चालू हो चुके हैं।


जीवों के संरक्षण पर जोर

सरकार ने यह भी बताया कि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और राज्य वन विभागों के सहयोग से डॉल्फिन, घड़ियाल, कछुए और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के प्रयासों से गंगा की जैव विविधता में सुधार हुआ है। औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जाजमऊ, बंथर और मथुरा में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें से दो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।


अन्य नदियों में भी प्रदूषण कम 

सरकार के अनुसार, 2017 की तुलना में 2024 तक BOD लोड 26 टन प्रतिदिन से घटकर 10.75 टन प्रतिदिन हो गया है, जबकि एफ्लुएंट डिस्चार्ज में करीब 23.9 प्रतिशत की कमी आई है। इसके अलावा, नेशनल रिवर कंजर्वेशन प्लान (NRCP) के तहत देश की अन्य नदियों में भी प्रदूषण नियंत्रण का काम जारी है। अब तक इस योजना के तहत 17 राज्यों के 100 शहरों में 58 नदियों को शामिल किया गया है।