ग्लोबल टेंडर का खेल, स्थानीय ठेकेदार फेल : बीजेपी विधायक प्रमोद कुमार ने अपनी ही सरकार को घेरा, बोले- धूल फांक रहे हैं हमारे लोग
बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उस वक्त दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई जब भाजपा विधायक प्रमोद कुमार ने अपनी ही सरकार के 'ग्लोबल टेंडर' मॉडल पर सवाल उठाए और ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी को कटघरे में खड़ा किया।
Patna - बिहार विधानसभा में ग्रामीण कार्य विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक प्रमोद कुमार ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने 'ग्लोबल टेंडर' प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस व्यवस्था के कारण स्थानीय छोटे ठेकेदार आज धूल फांकने को मजबूर हैं। प्रमोद कुमार ने आरोप लगाया कि ग्लोबल टेंडर के माध्यम से बड़े ठेकेदार काम तो ले लेते हैं, लेकिन वे खुद काम करने के बजाय पेटी कांट्रेक्टर (उप-ठेकेदार) की तलाश करते हैं, जिससे विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है।
इतिहास का हवाला: नीतीश और सुशील मोदी की शर्त
प्रमोद कुमार ने सदन को साल 2005 का वह दौर याद दिलाया जब केंद्र की यूपीए सरकार में तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने एनटीपीसी और एनएचपीसी जैसी बड़ी एजेंसियों को ग्लोबल टेंडर दे दिया था। उन्होंने बताया कि उस समय काम अधूरा रहने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने केंद्र के सामने कड़ी शर्त रखी थी कि सड़क निर्माण का कार्य स्थानीय ठेकेदारों से ही कराया जाए। इसी विरोध के बाद ग्लोबल टेंडर को खत्म कर 'पार्ट-बाय-पार्ट' निविदा की शुरुआत हुई थी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और जवाबदेही बढ़ी थी।
मंत्री अशोक चौधरी पर निशाना और अधूरे कार्यों का हिसाब
विधायक ने सीधे तौर पर ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी को घेरते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में सात बड़ी एजेंसियों को 102 सड़कों का जिम्मा सौंपा गया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि काम अब तक अधूरा है। प्रमोद कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि अधिकारियों के पास कोई वर्क चार्ट नहीं है और ठेकेदारों को यह तक स्पष्ट नहीं है कि उन्हें करना क्या है। उन्होंने मंत्री से मांग की कि ऐसे संवेदकों की जिम्मेदारी तय की जाए जिन्होंने समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं किया है।
पेटी कांट्रेक्टर मॉडल से गुणवत्ता पर संकट
सदन में चर्चा के दौरान प्रमोद कुमार ने 'पेटी कांट्रेक्टर' व्यवस्था को भ्रष्टाचार और देरी की मुख्य जड़ बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल टेंडर लेने वाली कंपनियां महज कागजों पर काम करती हैं और फील्ड में काम छोटे और अनुभवहीन उप-ठेकेदारों के हवाले कर दिया जाता है। इस 'चेन सिस्टम' के कारण बजट का बड़ा हिस्सा कमीशन में चला जाता है और निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। विधायक ने जोर देकर कहा कि इस मॉडल को तुरंत बदलने की जरूरत है ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।
भविष्य के लिए सुझाव और जवाबदेही की मांग
अपने संबोधन के अंत में भाजपा विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में होने वाली निविदाओं में 'ग्लोबल' के स्थान पर 'लोकल' को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि निविदाओं को छोटे-छोटे हिस्सों (पार्ट-बाय-पार्ट) में विभाजित किया जाए ताकि स्थानीय ठेकेदार इसमें भाग ले सकें। साथ ही, उन्होंने लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान कार्यों की गहन समीक्षा की जानी चाहिए और लंबित प्रोजेक्ट्स को शीघ्र अति शीघ्र पूरा कराया जाना चाहिए।
रिपोर्ट - रंजन कुमार