नया कीर्तिमान: मात्र 6.5 घंटे में बदला इतने किमी लंबा रेलवे ट्रैक, जानें क्या है PQRS तकनीक
उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने PQRS तकनीक से मात्र 6.5 घंटे में 64 पैनल ट्रैक बदलकर नया रिकॉर्ड बनाया। ट्रेनों की गति और सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह बड़ा कदम है।
Prayagraj - उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेलवे ने बेहद कम समय में ट्रैक बदलने का अपना ही पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। इस अभियान की खास बात यह रही कि यात्रियों को ट्रैक बदले जाने का आभास तक नहीं हुआ और ट्रेनों का परिचालन न्यूनतम बाधा के साथ जारी रहा।
रिकॉर्ड समय में रिकॉर्ड काम
मंडल ने आधुनिक तकनीक का परिचय देते हुए मात्र 6.5 घंटे के ट्रैफिक ब्लॉक में 64 पैनल (लगभग 0.806 किलोमीटर) ट्रैक को सफलतापूर्वक बदल दिया। यह कार्य पंडित दीन दयाल उपाध्याय – प्रयागराज खंड के डाउन मेन लाइन (ग्रुप ‘A’ मार्ग) पर स्थित करछना–भीरपुर ब्लॉक सेक्शन में पूरा किया गया। इस उपलब्धि के साथ ही प्रयागराज मंडल ने उत्तर मध्य रेलवे में अपना पिछला 56 पैनल बदलने का रिकॉर्ड तोड़कर नया इतिहास रच दिया है।
क्या है PQRS तकनीक?
इस सफलता के पीछे PQRS (Plasser Quick Relaying System) तकनीक का हाथ है। यह स्वचालित क्रेनों पर आधारित एक आधुनिक प्रणाली है, जो ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया को अत्यधिक तेज, सुरक्षित और उच्च गुणवत्तापूर्ण बनाती है। पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस तकनीक से काम करने पर रेल संचालन पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है और सीमित समय में अधिक आउटपुट प्राप्त होता है।
यात्रा होगी सुरक्षित और तेज
ट्रैक के इस नवीनीकरण से न केवल ट्रेनों की सुरक्षा (Safety) सुनिश्चित होगी, बल्कि उनकी गति में भी इजाफा होगा। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, नए ट्रैक बिछने से झटकों में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव होगा। प्रयागराज मंडल के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और समर्पण के कारण ही इतने बड़े लक्ष्य को इतने कम समय में हासिल करना संभव हो पाया है।
भविष्य की योजनाएं
भारतीय रेलवे की योजना अब इस तकनीक को अन्य सेक्शनों में भी विस्तार देने की है। रेलवे का मुख्य उद्देश्य पुराने और जर्जर ट्रैकों को बदलकर पूरे नेटवर्क को आधुनिक बनाना है, ताकि भविष्य में ट्रेनों की औसत गति को बढ़ाया जा सके और यात्रियों के यात्रा समय को कम किया जा सके। आने वाले समय में 'न्यूनतम ब्लॉक' नीति के तहत ऐसे और भी कार्य देखने को मिलेंगे।