राहुल गांधी का पटना दौरा रद्द, 36 हजार युवाओं की तैयारी पर लगा ब्रेक, क्या राजद-कांग्रेस की तकरार बनी वजह? पढ़िए...

Patna Visit Rahul Gandhi: बिहार की सियासत में राहुल गांधी के प्रस्तावित पटना दौरे के रद्द होने के बाद अब इसके पीछे की वजहों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

राहुल गांधी का पटना दौरा रद्द या सियासी संदेश? - फोटो : social Media

Patna Visit Rahul Gandhi: बिहार की सियासत में राहुल गांधी के प्रस्तावित पटना दौरे के रद्द होने के बाद अब इसके पीछे की वजहों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पेपर लीक मामले में छात्रों की आवाज उठाने के लिए 11 से 15 जुलाई के बीच राहुल गांधी पटना आने वाले थे। कांग्रेस ने इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारी की थी। करीब 36 हजार युवाओं ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था और बापू सभागार भी बुक किया गया था। लेकिन अचानक कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।

कांग्रेस की ओर से इसे आचार संहिता और प्रशासनिक परिस्थितियों से जोड़कर बताया जा रहा है, लेकिन सियासी जानकार इसके पीछे महागठबंधन के अंदर चल रही खींचतान को भी बड़ी वजह मान रहे हैं। खासकर बांकीपुर उपचुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच बढ़ी तल्खी ने इस पूरे मामले को और हवा दे दी है।दरअसल, बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस ने विपक्षी दलों से जन सुराज के प्रशांत किशोर को समर्थन देने की अपील की थी। कांग्रेस की इस रणनीति के बाद राजद ने रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले से कांग्रेस खेमे में नाराजगी की चर्चा तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सहयोगी दलों से बातचीत किए बिना राजद ने एकतरफा फैसला ले लिया।

सूत्रों के मुताबिक, इसी सियासी तनाव के बीच राहुल गांधी का पटना दौरा टालने का फैसला लिया गया। कांग्रेस ने पहले 11 जुलाई के लिए बापू सभागार बुक कराया था, फिर इसे 11 से 13 जुलाई और बाद में 15 जुलाई तक बढ़ाया गया। लेकिन अंत में पूरी बुकिंग रद्द कर दी गई।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का कार्यक्रम छात्रों के बीच जाने और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाने के लिए था। पटना में राहुल गांधी सड़क पर उतरकर छात्रों से संवाद करने वाले थे। लेकिन जिन इलाकों में उनका कार्यक्रम प्रस्तावित था, उसका बड़ा हिस्सा बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में उपचुनाव के दौरान यह कार्यक्रम राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा सकता था।

कांग्रेस के कार्यक्रम संयोजक अनुपम ने कहा कि उपचुनाव के कारण क्षेत्र में आचार संहिता लागू है, इसलिए आयोजन स्थगित किया गया। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर अनुमति लेकर कार्यक्रम किया जाता तो रास्ता निकाला जा सकता था।इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार कांग्रेस की अंदरूनी कलह भी चर्चा में है। विधानसभा चुनाव के महीनों बाद भी कांग्रेस विधानसभा में अपना नेता तय नहीं कर पाई है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, पूर्व विधायक दल नेता शकील अहमद खान और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के बीच मतभेद की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी का दौरा सिर्फ छात्र मुद्दों को लेकर नहीं था, बल्कि बिहार में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश भी थी। लेकिन राजद के साथ तालमेल, बांकीपुर उपचुनाव और पार्टी के अंदरूनी विवादों ने इस कार्यक्रम पर सियासी साया डाल दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस और राजद के बीच गठबंधन की डोर कितनी मजबूत है? क्योंकि एक तरफ कांग्रेस अकेले अपनी पहचान मजबूत करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी का पटना दौरा टलना फिलहाल बिहार की राजनीति में सिर्फ एक कार्यक्रम का रद्द होना नहीं, बल्कि गठबंधन की अंदरूनी राजनीति का नया संकेत माना जा रहा है।