पटना से चार शहरों की दूरी होगी बेहद कम, घंटों का रास्ता मिनटों में होगा तय, 160 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली रैपिड रेल बदलेगी बिहार की रफ्तार

Bihar Rapid Rail: बिहार की रफ्तार अब बदलने वाली है। मेट्रो से करीब तीन गुना तेज और 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली रैपिड रेल सेवा अब बिहार में भी दस्तक देने जा रही है। ...

पटना से चार शहरों की दूरी होगी बेहद कम- फोटो : social Media

Bihar Rapid Rail: बिहार की रफ्तार अब बदलने वाली है। मेट्रो से करीब तीन गुना तेज और 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली रैपिड रेल सेवा अब बिहार में भी दस्तक देने जा रही है। सम्राट सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाते हुए राज्य के प्रमुख शहरों को सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। करीब 400 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को बिहार के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है।

8 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने रैपिड रेल का खाका तैयार करने की जिम्मेदारी देश की पहली रैपिड रेल सेवा शुरू करने वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) को सौंपी है। यही संस्था दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही ‘नमो भारत’ रैपिड रेल सेवा का संचालन और विकास कर रही है।रैपिड रेल सामान्य ट्रेन और मेट्रो से अलग एक सेमी हाई-स्पीड यात्री सेवा है, जिसका मकसद दो बड़े शहरों के बीच की दूरी को कम समय में तय करना है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां करीब 82 किलोमीटर की दूरी महज 50 से 55 मिनट में पूरी हो जाती है।

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल की डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑपरेशनल स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी औसत रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, जो मेट्रो की सामान्य रफ्तार से लगभग तीन गुना ज्यादा है।अगर बिहार में इसी मॉडल को लागू किया जाता है तो पटना से आसपास के प्रमुख शहरों की दूरी काफी कम हो जाएगी। अनुमान के मुताबिक रैपिड रेल शुरू होने के बाद पटना से गया की 92 किलोमीटर दूरी करीब 55 से 60 मिनट में, पटना से मुजफ्फरपुर की 80 किलोमीटर दूरी 45 से 50 मिनट में, पटना से आरा की 70 किलोमीटर दूरी 40 से 45 मिनट में और पटना से बेगूसराय की 120 किलोमीटर दूरी करीब सवा घंटे में पूरी हो सकेगी।

सरकार ने फिलहाल चार संभावित रैपिड रेल कॉरिडोर की योजना तैयार की है। इनमें पटना-गया कॉरिडोर, पटना एयरपोर्ट-बेगूसराय कॉरिडोर, पटना-हाजीपुर-सोनपुर एयरपोर्ट-मुजफ्फरपुर कॉरिडोर और पटना एयरपोर्ट-आरा कॉरिडोर शामिल हैं।NCRTC इन सभी रूटों का अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट (AAR) और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगा। इसके लिए कैबिनेट ने 31.59 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। रिपोर्ट में यह तय होगा कि किस रूट पर एलिवेटेड ट्रैक बनेगा, कहां अंडरग्राउंड लाइन की जरूरत होगी और कितने स्टॉपेज रखे जाएंगे।

रैपिड रेल की सबसे बड़ी खासियत इसकी आधुनिक सुविधाएं होंगी। इसमें छह कोच होंगे, जिनमें एक प्रीमियम कोच और एक महिलाओं के लिए आरक्षित कोच होगा। सामान्य कोच में 72 और प्रीमियम कोच में 62 सीटें होंगी। पूरी ट्रेन में एक साथ करीब 1700 यात्री सफर कर सकेंगे। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर कोच में दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए आरक्षित सीटें होंगी। व्हीलचेयर और स्ट्रेचर रखने की व्यवस्था भी होगी। छोटे बच्चों के लिए महिला शौचालय में डायपर चेंजिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

सुरक्षा के मोर्चे पर भी रैपिड रेल हाईटेक होगी। प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और ट्रेन के दरवाजे एक साथ लॉक होंगे, जिसके बाद ही ट्रेन आगे बढ़ेगी। स्टेशन पर एआई आधारित सुरक्षा जांच प्रणाली, आधुनिक मेटल डिटेक्टर और लगेज स्कैनर लगाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि इस सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से न सिर्फ यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि बिहार की आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी।हालांकि अभी डीपीआर और तकनीकी अध्ययन पूरा होना बाकी है, लेकिन इतना तय है कि अगर यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है तो पटना और आसपास के शहरों के बीच सफर का पूरा अंदाज बदल जाएगा। बिहार में अब सड़क और सामान्य रेल के साथ हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का नया दौर शुरू होने की उम्मीद है।