पंडारक में खुदरा उर्वरक विक्रेताओं ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, कालाबाजारी व ऑनलाइन व्यवस्था के खिलाफ खोला मोर्चा

खुदरा उर्वरक विक्रेताओं ने कालाबाजारी व ऑनलाइन व्यवस्था के खिलाफ खोला मोर्चा- फोटो : रवि शंकर

Patna : जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत पंडारक प्रखंड में खुदरा उर्वरक विक्रेता संघ के बैनर तले दर्जनों व्यापारियों ने गोलबंद होकर अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) को एक ज्ञापन सौंपा। विक्रेताओं ने खाद की कालाबाजारी, थोक विक्रेताओं द्वारा तय दर से अधिक मूल्य वसूले जाने और जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। व्यापारियों का कहना है कि व्यवस्था की खामियों के कारण विक्रेता और किसान दोनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


थोक विक्रेताओं पर मनमाने दाम वसूलने का आरोप 

सौंपे गए ज्ञापन में विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि उर्वरक का नियत सरकारी मूल्य 242 रुपये प्रति पैकेट निर्धारित है, लेकिन होलसेल (थोक) व्यापारी उन्हें 310 रुपये प्रति पैकेट की दर से खाद दे रहे हैं। इसके अलावा थोक मंडी से खाद को अपनी दुकानों तक लाने में विक्रेताओं को लगभग 50 रुपये प्रति पैकेट अतिरिक्त परिवहन खर्च उठाना पड़ता है। इस प्रकार एक पैकेट खाद की लागत ही 360 रुपये बैठती है, जिससे उन्हें किसानों को मजबूरी में इसी बढ़ी हुई दर पर खाद बेचना पड़ रहा है।


विक्रेताओं और किसानों के बीच बढ़ रहा विवाद 

विक्रेताओं का कहना है कि सरकारी दर और जमीनी हकीकत में भारी अंतर होने के कारण किसानों और विक्रेताओं के बीच आए दिन बकझक और विवाद की स्थिति बनी रहती है। किसान निर्धारित दर पर खाद की मांग करते हैं, जबकि थोक विक्रेताओं की मनमानी और ऊंचे परिवहन खर्च के कारण खुदरा विक्रेता सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस स्थिति से प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों छोटे-बड़े किसान और स्थानीय दुकानदार दोनों ही बेहद परेशान हैं।


जटिल ऑनलाइन व्यवस्था से छोटे किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ 

प्रदर्शनकारी उर्वरक विक्रेताओं ने सरकार द्वारा लागू की गई ऑनलाइन वितरण प्रक्रिया का भी पुरजोर विरोध किया। उन्होंने बताया कि व्यवस्था इतनी जटिल कर दी गई है कि यदि किसी किसान को मात्र 5 किलो भी उर्वरक लेना हो, तो उसके लिए पहले ऑनलाइन ऑर्डर करना अनिवार्य है। इस ऑनलाइन प्रक्रिया और साइबर कैफे के चक्कर में किसान का 50 रुपये अतिरिक्त खर्च हो जाता है। जितनी कीमत की खाद नहीं होती, उससे अधिक खर्च किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में देना पड़ रहा है।


प्रशासनिक कार्रवाई और दरों पर नियंत्रण की मांग विक्रेताओं ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी से मांग की है कि थोक विक्रेताओं पर शिकंजा कसते हुए उन्हें निर्धारित सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरक मिल सके। साथ ही छोटे किसानों के हित में ऑनलाइन व्यवस्था को व्यावहारिक और सरल बनाने की अपील की गई है। दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही थोक विक्रेताओं की मनमानी पर रोक नहीं लगाई गई और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे आगे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

रवि शंकर की रिपोर्ट