फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश : सीएससी संचालक समेत दो गिरफ्तार, फिंगरप्रिंट व लैपटॉप बरामद

साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में सुपौल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने छापेमारी कर अवैध तरीके से जाली कागजात तैयार करने वाले एक गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को धर दबोचा है....

फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश : सीएससी संचालक
फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का खुलासा- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मरौना थाना क्षेत्र में अवैध तरीके से जाली कागजात तैयार करने वाले एक गिरोह का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कई हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सिलिकॉन फिंगरप्रिंट और जाली कागजात बरामद किए हैं।


गुप्त सूचना पर सीएससी और डिजिटल स्टूडियो में रेड 

पुलिस के अनुसार, 10 सितंबर 2026 को मरौना स्थित एक कॉमन सर्विस सेंटर द्वारा फर्जी तरीके से आधार कार्ड, निवास प्रमाण-पत्र और जन्म प्रमाण-पत्र बनाकर आम लोगों से मनमाना पैसा वसूलने की सूचना मिली थी। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर थाने की विशेष टीम ने मरौना स्थित 'संजीव कॉमन सर्विस सेंटर' (भलुआही) और 'अजय डिजिटल स्टूडियो' (भलुआही) में एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की।


सिलिकॉन फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैनर समेत भारी सामान जब्त 

सघन तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके से 5 लैपटॉप, 1 डमी रबर/सिलिकॉन फिंगर प्रिंट, 1 आईरिस स्कैनर, 2 पेन ड्राइव और 1 फिंगर स्कैनर बरामद किया है। इसके अलावा पुलिस को भारी मात्रा में ब्लैंक जन्म प्रमाण-पत्र, आधार इनरोलमेंट किए हुए फॉर्म और कई अन्य फर्जी दस्तावेज मिले हैं, जिनका इस्तेमाल लोगों को ठगने और जाली कागजात बनाने में किया जा रहा था।


सुमेष और अजय के रूप में हुई आरोपियों की पहचान 

मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुमेष कुमार (निवासी कुशमौल, मरौना, सुपौल) और अजय कुमार सिंह (निवासी कुसौर, जिला मधुबनी) को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना सुपौल में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


गिरोह के अन्य नेटवर्क की तलाश में छापेमारी जारी 

पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किन-किन अवैध कार्यों में किया गया है और इनके तार कहां-कहां से जुड़े हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फर्जीवाड़ा करने वाले इस नेटवर्क में शामिल अन्य असामाजिक तत्वों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।


विनय कुमार मिश्रा की रिपोर्ट