रितु जायसवाल हुई भाजपा में शामिल, राजद को बीजेपी ने दिया एक और बड़ा झटका, इन क्षेत्रों में मजबूत पकड़

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में टिकट कटने के बाद राजद नेतृत्व से नाराज चल रहीं रितु जायसवाल मंगलवार, 26 मई को पटना स्थित भाजपा कार्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा की सदस्यता ली।

Ritu Jaiswal joins BJP- फोटो : news4nation

Ritu Jaiswal :  रितु जायसवाल ने मंगलवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली . उन्हें बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी और मंत्री दिलीप जायसवाल की मौजूदगी में सदस्यता दिलाई गई. रितु जायसवाल के भाजपा में आने को लालू यादव और तेजस्वी यादव के लिए बड़ा झटका  माना जा रहा है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तेजतर्रार नेता और कभी लालू-तेजस्वी यादव की करीबी मानी जाने वाली ‘मुखिया दीदी’ रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने से इसे बिहार की राजनीति में अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे राजद के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं, क्योंकि रितु मिथिलांचल की सक्रिय और प्रभावशाली महिला नेताओं में गिनी जाती हैं। 


जदयू से सियासी सफर 

दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में टिकट कटने के बाद पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहीं रितु जायसवाल मंगलवार, 26 मई को पटना स्थित भाजपा कार्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा की सदस्यता ली। रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर जदयू से शुरू हुआ था। बाद में वह राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हुईं, जहां उन्हें महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी प्रवक्ता जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलीं। 2021 से 2023 तक वह राजद की प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहीं और टीवी डिबेट्स में पार्टी का मुखर पक्ष रखती थीं।


दो बार राजद से टिकट 

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से मामूली अंतर से हारने के बावजूद लालू परिवार का भरोसा उन पर कायम रहा। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जदयू की लवली आनंद को कड़ी टक्कर दी। रितु करीब 4.47 लाख वोट हासिल करने में सफल रहीं, हालांकि लगभग 29 हजार वोटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।


राजद उम्मीदवार को दिया झटका 

लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट कटना उनके और राजद नेतृत्व के बीच दूरी की बड़ी वजह बना। पार्टी ने इस सीट से वरिष्ठ नेता रामचंद्र पूर्वे की बहू को उम्मीदवार बनाया, जिससे नाराज होकर रितु ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने करीब 64 हजार वोट हासिल किए, जिसका सीधा नुकसान राजद को उठाना पड़ा और पार्टी को सीट गंवानी पड़ी। बाद में राजद ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।


वंदना की रिपोर्ट