मोहिउद्दीननगर और बेतिया की घटना को लेकर डीजीपी से मिला राजद प्रतिनिधिमंडल, पुलिस कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

बिहार में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं और पुलिसिया कार्यशैली पर विपक्ष ने सवाल खड़ा किया है। मोहिउद्दीननगर और बेतिया में हुई गंभीर आपराधिक घटनाओं को लेकर राजद के प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी से मुलाकात कर जांच और कार्रवाई की मांग की है..

मोहिउद्दीननगर और बेतिया की घटना को लेकर डीजीपी से मिला राजद प्रतिनिधिमंडल- फोटो : रंजन कुमार

Patna : बिहार के विभिन्न जिलों में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं और पुलिसिया लापरवाही के खिलाफ विभिन्न राजनीतिक दलों और प्रतिनिधियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में राजद विधायक भाई वीरेन्द्र के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात कर मोहिउद्दीननगर और बेतिया में हुई गंभीर घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मीडिया से बातचीत करते हुए नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि पीड़ितों को जल्द न्याय नहीं मिला तो वे संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


मोहिउद्दीननगर में बीजेपी मंडल अध्यक्ष पर युवक को लाठी-डंडों से पीटकर बेहोश करने का आरोप

घटना के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए राजद विधायक भाई वीरेन्द्र ने बताया कि मोहिउद्दीननगर के वार्ड नंबर-3 में बीते 7 अक्टूबर को गोलू साव नामक युवक के साथ क्रूरता की हदें पार कर दी गईं। आरोप है कि स्थानीय भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेश कुमार सिन्हा और अन्य लोगों ने मिलकर उसे लाठी-डंडों से इतनी बेरहमी से पीटा कि वह गंभीर रूप से बेहोश हो गया। परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा एसपी से गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में सही धाराओं में प्राथमिकी दर्ज नहीं की, और जब लोग थाने पहुंचे तो लीपापोती की कोशिश की गई।


बेतिया में दिलशाद अंसारी की संदिग्ध मौत मामले में पुलिस संलिप्तता और सीबीआई जांच की मांग

वहीं बेतिया की एक अन्य सनसनीखेज घटना का जिक्र करते हुए कहा कि दिलशाद अंसारी नामक महिला को पुलिस द्वारा आधी रात (लगभग 2 बजे) में उठाया जाता है और सुबह 5 बजे उसकी लाश मिलती है। इस घटना में सीधी तौर पर पुलिस की संलिप्तता और गहरी साजिश की बू आ रही है। हमारी मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कड़ी सजा मिले।


पुलिस प्रशासन पर अपराधियों को बचाने और मनमानी करने का गंभीर आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और पुलिस आम जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के बजाय अपराधियों और सत्ता संरक्षित लोगों को बचाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि जब आम नागरिक या पीड़ित अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो उनकी शिकायतों को दरकिनार कर दिया जाता है। पुलिस थानों में न्याय मिलने के बजाय लीपापोती का दौर चल रहा है, जिससे जनता का प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है।


संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देकर न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी

अंत में चेतावनी देते हुए कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हर नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा और न्याय पाने का अधिकार मिला हुआ है।


भाई वीरन्द्र ने कहा कि डीजीपी से पूरे मामले पर कार्रवाई किये जाने का आश्वासन मिला है। लेकिन यदि पुलिस प्रशासन ने जल्द ही आरोपी व्यक्तियों और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता और पीड़ित परिवार न्याय के लिए सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करने को विवश होंगे।


रंजन की रिपोर्ट