अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप पर हुई ईडी छापामारी तो भड़का राजद, बिहारी उद्योगपति को इसलिए किया जा रहा परेशान

अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप पर प्रवर्त्तन निदेशालय की छापामारी के बाद बिहार के सियासत गरमा गई है. राजद सांसद मनोज झा ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसा है.

ED raid on Anil Agarwals Vedanta Group- फोटो : news4nation

ED raid on Anil Agarwals Vedanta Group : बिहार मूल के उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े मामले में छापेमारी की है। ईडी की टीम विदेशी लेनदेन और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर की जा रही है। जांच एजेंसी कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, निवेश और विदेशों में हुए लेनदेन की पड़ताल में जुटी है।  


राजद सांसद की आपत्ति

वहीं इस छापेमारी पर अब बिहार के प्रमुख विपक्षी दल राजद ने गहरी आपत्ति जताई है। राज्यसभा सांसद मनोज झा ने मंगलवार को इसे लेकर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा है- आज सुबह-सुबह ईडी ने एक नए ठिकाने पर दस्तक दी। बताया गया कि यह ठिकाना Anil_Agarwal के Vedanta से जुड़ा है जिनका बिहार से ताल्लुक है। राजनीतिक गलियारों और मीडिया में यह चर्चा पहले से थी कि आज नहीं तो कल उन्हें भी यह एहसास कराया जाएगा कि सत्ता के समीकरणों में आर्थिक ताक़त की भी एक तय सीमा होती है। वजह? कहा जा रहा है कि उन्होंने "राष्ट्रीय-सेठ" की इच्छा के विरुद्ध एक छोटी-सी, बहुत ही छोटी सी असहमति दिखाने की जुर्रत की थी।


उन्होंने लिखा है - लोकतंत्र में संस्थाओं की कार्रवाई पर सवाल उठाना आसान नहीं होता। लेकिन जब जांच एजेंसियों की सक्रियता का पैटर्न बार-बार राजनीतिक और कारोबारी असहमतियों के आसपास दिखाई देने लगे, तो सवाल केवल किसी एक व्यक्ति या समूह का नहीं रह जाता। तब चिंता इस बात की होती है कि क्या संस्थाएं अपने घोषित उद्देश्य के अनुसार काम कर रही हैं या फिर सत्ता द्वारा प्रयुक्त निरंकुश औज़ार में बदलती जा रही हैं। "एक राष्ट्र, एक चुनाव" की बहस के बाद यदि कोई नया नारा गढ़ना हो, तो शायद कुछ लोग कहें—"एक राष्ट्र, एक ही दल"। और अगर आर्थिक शक्ति तथा राजनीतिक शक्ति का केंद्रीकरण इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो अगला चरण शायद बहुत ज़ल्द होगा—"एक राष्ट्र, एक ही सेठ"।


वही वेदांता ग्रुप की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कंपनी ने कहा कि वह सभी नियमों और कानूनों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है। वेदांता देश की बड़ी खनन और धातु कंपनियों में शामिल है। कंपनी एल्युमिनियम और जिंक उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती है, जबकि कच्चे तेल के उत्पादन में भी उसकी अहम हिस्सेदारी है। समूह ने आने वाले वर्षों में भारत में बड़े निवेश की योजनाओं का भी ऐलान किया है।


अडानी से हुआ था विवाद 

जयप्रकाश एसोसिएट्स (जेपी) के अधिग्रहण की लड़ाई इसका ताज़ा उदाहरण है, जहाँ दोनों समूहों ने बोली लगाई और विवाद भी सामने आया, वेदांता की बोली ज्यादा थी लेकिन टेंडर अड़ानी को मिला। खिसियाकर वेदांता ग्रुप सुप्रीम कोर्ट चला गया। 


पहले भी कई विवाद 

हालांकि वेदांता पहले भी कई विवादों में घिर चुकी है। अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ के एक पावर प्लांट में बॉयलर विस्फोट के बाद कंपनी की शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी, जिसमें 20 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई थी। इसके अलावा ओडिशा में बिना अनुमति नदी से पानी लेने के आरोप में कंपनी पर 233 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया था। विदेशी मुद्रा नियमों को लेकर भी वेदांता पहले जांच का सामना कर चुकी है। वर्ष 2004 में समूह की एक कंपनी और उसके निदेशकों पर FEMA नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे, जिसके बाद जुर्माना भी लगाया गया था।


क्या है FEMA

दरअसल, FEMA के तहत ईडी तब कार्रवाई करती है जब किसी व्यक्ति या कंपनी पर विदेशों में अवैध धन भेजने, हवाला कारोबार, विदेशी निवेश नियमों के उल्लंघन या विदेश में संपत्ति खरीद से जुड़े नियम तोड़ने का संदेह होता है।


बिहार से गहरा नाता 

अनिल अग्रवाल का बिहार से गहरा नाता रहा है। उनका परिवार मूल रूप से बिहार से जुड़ा माना जाता है और वे समय-समय पर बिहार के विकास, उद्योग और निवेश को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उन्होंने कई बार बिहार की प्रतिभा, मेहनतकश लोगों और राज्य में औद्योगिक संभावनाओं को लेकर पोस्ट किए हैं। बिहार में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर भी वे कई मौकों पर बयान दे चुके हैं।