Bihar government strict action: डेडलाइन मिस, एक्शन फिक्स, सड़क अधूरी छोड़ने पर ठेकेदार ब्लैकलिस्ट, विभाग के सख्त फैसले से हड़कंप

Bihar government strict action: ग्रामीण कार्य विभाग ने विकास कार्यों में सुस्ती और लापरवाही दिखाने वाले संवेदकों पर आखिरकार कड़ा शिकंजा कस दिया है।

नो कम्प्रोमाइज ऑन डेवलपमेंट- फोटो : social Media

Bihar government strict action: ग्रामीण कार्य विभाग ने विकास कार्यों में सुस्ती और लापरवाही दिखाने वाले संवेदकों पर आखिरकार कड़ा शिकंजा कस दिया है। सीतामढ़ी कार्य प्रमंडल में सड़क निर्माण के नाम पर खेल कर रहे एक संवेदक पर ऐसी कार्रवाई हुई है, जिसने ठेकेदारों में हड़कंप मचा दिया है। विभाग ने उसे सीधे तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया यानी अब न टेंडर मिलेगा, न कोई सरकारी काम।

मामला मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना से जुड़ा है, जिसके तहत इस संवेदक को जिले में तीन अहम ग्रामीण सड़कों का निर्माण करना था। एकरारनामा के मुताबिक 30 जुलाई 2025 तक काम पूरा होना था, लेकिन वक्त बीत गया और जमीन पर हकीकत शून्य ही रही। ना काम में रफ्तार आई, ना ही जिम्मेदारी का कोई अता-पता दिखा।

विभागीय जांच और स्थलीय निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने अफसरों के भी होश उड़ा दिए। एक सड़क पर तो काम शुरू तक नहीं हुआ था, जबकि बाकी दो सड़कों को अधूरा छोड़ दिया गया। साइट पर ना मशीनरी मिली, ना जरूरी सामग्री सब कुछ ठप, जैसे काम को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया हो। इतना ही नहीं, विभाग ने कई बार नोटिस देकर संवेदक को चेताया, लेकिन हर बार वही ढाक के तीन पात। ना जवाबदेही, ना कोई ठोस कदम बस टालमटोल का खेल चलता रहा। आखिरकार विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए बिहार ठीकेदारी निबंधन नियमावली 2007 के तहत सख्त फैसला लिया और संवेदक को ब्लैकलिस्ट कर दिया।

अधिकारियों ने साफ शब्दों में संदेश दे दिया है अब विकास कार्यों में लापरवाही या लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं होगी। जो भी ठेकेदार नियमों को ताक पर रखेगा, उस पर सीधी कार्रवाई होगी।

इस कार्रवाई के बाद साफ है कि सरकार अब काम नहीं, तो दाम नहीं के फॉर्मूले पर उतर चुकी है। और जो भी विकास की रफ्तार में ब्रेक लगाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार और तेज होगी।