रिकॉर्ड स्तर से ₹1.85 लाख सस्ती हुई चांदी: क्या आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर? जानें आखिर क्यों मची है सर्राफा बाजार में हाहाकार!

चांदी की कीमतों में 44% की ऐतिहासिक गिरावट। ₹4,20,048 के रिकॉर्ड स्तर से फिसलकर ₹2,34,700 पर आई चांदी। जानें क्या है गिरावट की वजह और निवेश का सही समय।

Patna : भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में पिछले कुछ समय से मंदी का दौर जारी है, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों को हैरत में डाल दिया है। जनवरी 2026 में चांदी ने ₹4,20,048 प्रति किलो का सर्वकालिक उच्चतम स्तर छुआ था, लेकिन वहां से कीमतें करीब 1.85 लाख रुपये गिरकर ₹2,34,700 के आसपास आ गई हैं। यह लगभग 44% की भारी गिरावट है, जो पिछले कई वर्षों में चांदी के भाव में आई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

वैश्विक तनाव और मजबूत डॉलर का दिख रहा असर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे घरेलू कारणों से ज्यादा वैश्विक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिका में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका ने चांदी की चमक फीकी कर दी है। इसके अलावा, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा की है, जिससे निवेशक जोखिम भरे कमोडिटी बाजार से दूरी बना रहे हैं।

औद्योगिक मांग और वैल्यू बाइंग का खेल

जानकारों के अनुसार, चांदी की प्रकृति सोने से काफी अलग है क्योंकि इसकी मांग का एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र से आता है। यही कारण है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में चांदी सोने की तुलना में अधिक तेजी से गिरती है। हालांकि, भारी गिरावट के बाद अब बाजार में 'वैल्यू बाइंग' (सस्ते भाव पर खरीदारी) देखी जा रही है। घरेलू बाजार में निवेशक कम कीमतों का फायदा उठाने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे कीमतों में मामूली रिकवरी के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं।

क्या हैं भविष्य के संकेत और रिकवरी की उम्मीद?

आने वाले समय को लेकर बाजार के विश्लेषक एक संतुलित नजरिया रख रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक राजनीतिक हालात स्थिर होते हैं और महंगाई के आंकड़ों में सुधार आता है, तो चांदी की कीमतें वापस पटरी पर लौट सकती हैं। लंबी अवधि में चांदी के ₹2,80,000 प्रति किलो के स्तर तक जाने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन डॉलर की मजबूती और ऊंचे ब्याज दरें इस बढ़त की राह में बड़ी बाधा बन सकते हैं।

निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह

मौजूदा स्थिति को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। हालांकि कीमतें आकर्षक स्तर पर हैं, लेकिन बाजार का जोखिम अभी कम नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को एक साथ सारा पैसा लगाने (Lumpsum) के बजाय 'स्टैगर्ड बाइंग' यानी धीरे-धीरे किश्तों में निवेश करना चाहिए। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा और भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद बनी रहेगी।