किसी ने छोड़ी हरियाणा की नौकरी तो कोई डिग्री लेकर था बेरोजगार, अब खेतों में स्ट्रॉबेरी उगाकर लाखों कमा रहे बिहार के युवा

-पारंपरिक धान-गेहूं की खेती छोड़िए, बिहार सरकार के 50% अनुदान के साथ शुरू करें स्ट्रॉबेरी की खेती, महज 45 से 60 दिन में शुरू हो जाती है बंपर कमाई

स्ट्रॉबेरी की खेती कर बने लखपति- फोटो : रिपोर्टर

Patna : क्या आपने कभी सोचा था कि ठंडे प्रदेशों में होने वाली स्ट्रॉबेरी बिहार की मिट्टी में भी उगेगी और किसानों को लखपति बना देगी, जी हां, आजकल बिहार के कई जिलों में किसान अपनी आमदनी दोगुनी करने के लिए खेतों में लाल सोना यानी स्ट्रॉबेरी उगा रहे हैं।


आखिर लोग यह खेती क्यों करें

 इसका सीधा सा जवाब है, शानदार मुनाफा। स्ट्रॉबेरी का पौधा लगाने के बाद मल्चिंग (प्लास्टिक से ढंकना) की जाती है और महज 45 दिन में इसकी तुड़ाई शुरू हो जाती है। एक पौधे से 1 से डेढ़ किलो तक फल निकलता है, जिसका बाजार में बहुत अच्छा रेट  मिलता है। आइए जानते हैं कैसे इस  फल ने बाहर में काम करने वाले मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की किस्मत बदल दी है।   


हरियाणा की नौकरी छोड़ औरंगाबाद के मुन्ना पटेल ने की शुरुआत

औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड अंतर्गत चिलमी बिगहा गांव के मुन्ना कुमार पटेल कभी हरियाणा में नौकरी किया करते थे, लेकिन परदेस की नौकरी छोड़कर वे अपने गांव लौटे और खेती को नया आयाम दिया। उन्होंने साल 2015 में महज 12 कट्ठे जमीन से स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की थी, जिससे उन्हें पहली बार में ही 3 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। आज वे लीज पर जमीन लेकर करीब 2 एकड़ में स्ट्रॉबेरी उगा रहे हैं और सालाना 15 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उनके खेतों में अब रोजाना 15 स्थानीय मजदूरों को रोजगार भी मिल रहा है।


डिग्री के बाद बेरोजगारी छोड़ी, लखीसराय के रमेश ने शुरू की खेती

सिर्फ औरंगाबाद ही नहीं, बल्कि लखीसराय के एक ग्रेजुएट युवा रमेश सिंह ने भी यह साबित कर दिया है कि लगन हो तो खेती में भी बेहतरीन भविष्य बनाया जा सकता है। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्हें मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने हार मानने के बजाय कृषि विभाग और 'आत्मा' (ATMA) योजना की मदद ली। कृषि कार्यालय से प्रशिक्षण और अनुदानित दरों पर पौधे प्राप्त कर उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। उनकी मेहनत रंग लाई और महज दो महीने के भीतर ही उन्हें 42,000 रुपये का शुरुआती मुनाफा हुआ, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है।


बिहार सरकार का 50% अनुदान और महज 45 से 60 दिन में बंपर कमाई

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ठंडे प्रदेशों में पैदा होने वाली स्ट्रॉबेरी अब बिहार की मिट्टी में भी सफलतापूर्व उगाई जा रही है। इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पौधा लगाने और मल्चिंग (प्लास्टिक से ढंकना) करने के बाद मात्र 45 से 60 दिन के भीतर इसकी तुड़ाई शुरू हो जाती है। एक पौधे से औसतन 1 से डेढ़ किलो तक फल निकल जाता है, जिसे बाजार में बेहद अच्छे दाम मिलते हैं। राज्य सरकार द्वारा इस खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 50% तक का अनुदान भी दिया जा रहा है।


बाजार में भारी मांग और किसानों की बढ़ती आय

औरंगाबाद के ही एक अन्य प्रगतिशील किसान उदय कुमार मेहता अब करीब 4 हेक्टेयर में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक एकड़ में आसानी से 4 से 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है। मुन्ना पटेल और उदय कुमार जैसे किसानों द्वारा उगाई जाने वाली स्ट्रॉबेरी अब केवल बिहार के स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पटना से लेकर कोलकाता, रांची, बोकारो और धनबाद जैसे बड़े शहरों के बाजारों में भी आपूर्ति की जा रही है।