भाई के इलाज का बोझ और गरीबी की मार: बीए के छात्र ने की खुदकुशी, कमरे में फंदे से लटका मिला शव

सुपौल के जदिया में बीए के छात्र प्रशांत कुमार ने भाई के इलाज के भारी खर्च और आर्थिक तंगी से परेशान होकर फांसी लगा ली। पिता पंजाब में मजदूरी करते हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सुपौल के जदिया में मृत छात्र के घर के बाहर जुटी भीड़ और पुलिस कार्रवाई।- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supual - : बिहार के सुपौल जिले के जदिया थाना अंतर्गत कोरियापट्टी पूर्व पंचायत में सोमवार को एक मेधावी छात्र की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। बीए पार्ट-वन के छात्र प्रशांत कुमार उर्फ भानु (20) ने अपने घर के कमरे में मफलर के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि प्रशांत अपने बड़े भाई के इलाज के लिए भारी खर्च और घर की दयनीय आर्थिक स्थिति को लेकर गहरे तनाव में था। 

पीएमसीएच में चल रहा है भाई का इलाज

परिजनों के अनुसार, करीब पांच दिन पहले प्रशांत के बड़े भाई का भीषण सड़क हादसा हो गया था। वर्तमान में उसका इलाज पटना के पीएमसीएच (PMCH) में चल रहा है, जहाँ अब तक लगभग एक लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। भाई की गंभीर हालत और इलाज के लिए पैसों के इंतजाम की चिंता ने प्रशांत को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। 

पिता पंजाब में करते हैं मजदूरी

प्रशांत का परिवार बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आता है। उसके पिता पंजाब में मजदूरी कर प्रतिमाह महज 10 से 15 हजार रुपये कमाते हैं, जिससे पांच सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण मुश्किल से होता है। आर्थिक तंगी के बीच अचानक आए इस मेडिकल संकट ने परिवार को संकट में डाल दिया था, जिसका बोझ प्रशांत सहन नहीं कर सका। 

पढ़ाई में तेज और शांत स्वभाव का था प्रशांत

स्थानीय लोगों और सहपाठियों ने बताया कि प्रशांत पढ़ाई में काफी तेज और शांत स्वभाव का युवक था। उसका किसी से कोई विवाद नहीं था। सोमवार सुबह जब परिवार के सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे, तभी उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। जब परिजनों को घटना की जानकारी मिली, तो घर में कोहराम मच गया। 

पुलिस मामले की जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही जदिया पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि शुरुआती जांच में आत्महत्या का कारण पारिवारिक तनाव और आर्थिक तंगी प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस मामले के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है। 

रिपोर्ट -  विनय कुमार मिश्रा