IAS बनने की खुशी मातम में बदली:बिहार के युवक के साथ हुआ बड़ा खेल मसूरी पहुंचा युवक, गेट से हुआ गिरफ्तार

बिहार के एक युवक के साथ हुई साइबर ठगी की यह घटना न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि उन युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है जो सरकारी नौकरियों का सपना देख रहे हैं।

बिहार के सारण जिले का रहने वाला 28 वर्षीय पुष्पेश सिंह, जो गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत है, एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो गया। ठगों ने यूपीएससी अधिकारी बनकर उससे संपर्क किया और एक फर्जी ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की। इसके बाद उसे 'सफल' घोषित कर व्हाट्सएप पर फर्जी मेरिट लिस्ट और जाली सिलेक्शन लेटर भेज दिया गया। ठगों के झांसे में आकर पुष्पेश ने उन्हें 30,000 रुपये भी दिए और खुद को आईएएस अधिकारी मानते हुए ट्रेनिंग के लिए निकल पड़ा।


मसूरी पहुंचने पर खुला ठगी का राज

अपनी सफलता की खुशी में पुष्पेश अपने माता-पिता के साथ उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) पहुंच गया। जब वह अकादमी के गेट पर पहुंचा और अपने दस्तावेज दिखाए, तो वहां तैनात अधिकारियों को कागजों में गड़बड़ी मिली। जांच करने पर पता चला कि उसके पास मौजूद सभी दस्तावेज और ट्रेनिंग शेड्यूल पूरी तरह फर्जी थे। गेट से एंट्री न मिलने और पुलिस की पूछताछ के बाद युवक और उसके परिवार को अहसास हुआ कि वे एक गहरी साजिश का शिकार हो चुके हैं।

पुलिस कार्रवाई और 'जीरो एफआईआर' दर्ज

मामले की गंभीरता को देखते हुए मसूरी पुलिस के साथ स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने भी युवक से पूछताछ की। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि ठगों ने सरकारी मुहर और रैंक का इस्तेमाल कर दस्तावेजों को बेहद असली जैसा बनाया था। चूंकि ठगी की शुरुआत गुरुग्राम से हुई थी, इसलिए मसूरी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत 'जीरो एफआईआर' दर्ज कर मामला गुरुग्राम पुलिस को सौंप दिया है।

सिविल सर्विस उम्मीदवारों के लिए चेतावनी

पुलिस के अनुसार, यूपीएससी और अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं के नाम पर ठगी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले झारखंड में भी फर्जी आईपीएस पद के नाम पर लाखों की ठगी का गिरोह पकड़ा गया था। अधिकारी बताते हैं कि सिविल सेवाओं से जुड़ी प्रतिष्ठा के कारण उम्मीदवार अक्सर इन जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं। यूपीएससी लगातार सलाह देता है कि उम्मीदवार केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें और किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए नियुक्ति पत्रों या परिणामों की पुष्टि जरूर करें।