Bihar News : पंचायत सचिव संघ के नीति-निर्धारण कमेटी की बैठक खत्म, 'अभिकर्त्ता' से मुक्ति और उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन की दी चेतावनी

Bihar News : पंचायत सचिव संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित नीति-निर्धारण कमेटी की बैठक में कई गंभीर संगठनात्मक और नीतिगत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई....पढ़िए आगे

आन्दोलन की चेतावनी - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ की नीति-निर्धारण कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आज पटना के लोदीपुर हाउस स्थित कृष्णा कम्पाउंड कार्यालय में संपन्न हुई. संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पंचायत सचिवों से जुड़े कई गंभीर संगठनात्मक और नीतिगत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई. बैठक में मुख्य रूप से पंचायत सचिवों को 'अभिकर्त्ता' (एजेंट) की भूमिका से मुक्ति दिलाने और कार्यस्थल पर उनके साथ हो रहे सौतेले व्यवहार को लेकर रणनीति तैयार की गई.

बैठक में 'अभिकर्त्ता' से मुक्ति के विषय पर विशेष जोर देते हुए संघ के संयोजक सुनील कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष शिव गोविन्द राय, संघर्ष समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह एवं महामंत्री राकेश रंजन ने संयुक्त रूप से अपनी बात रखी. नेताओं ने कहा कि संघ की यह चिर-परिचित मांग पिछले तीन दशकों से चली आ रही है. अब समय आ गया है कि इस मांग को अंतिम अंजाम तक पहुँचाया जाए, ताकि सभी पंचायत सचिव अपनी नौकरी को सुरक्षित और भयमुक्त रखकर आम जनता की सेवा पूरी निर्भीकता के साथ कर सकें.

बैठक को संबोधित करते हुए संघ के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार ने निचले स्तर के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के रवैये पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर निचले स्तर के पदाधिकारी पंचायत सचिवों को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने देते. जबरन कार्यों को जनप्रतिनिधियों के हाथ सौंपकर पंचायत सचिवों को महज एक 'कठपुतली' बना दिया जाता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और वे मानसिक दबाव में काम करने को विवश हैं.

अध्यक्ष ने आगे कहा कि उच्च स्तर के पदाधिकारी गुणवत्ता की कमी निकालकर सीधे पंचायत सचिवों को ही निलंबित या बर्खास्त कर देते हैं. इतना ही नहीं, राशि वसूली के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) और सर्टिफिकेट केस तक दर्ज करा दिए जाते हैं. दूसरी तरफ, योजना का कार्य कराने वाले, संयुक्त रूप से भुगतान करने वाले जनप्रतिनिधियों और योजना की मापी करने वाले कर्मियों को पूरी तरह छोड़ दिया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि यह कहाँ का न्याय है कि गलती कोई और करे और सजा सिर्फ पंचायत सचिव भुगतें.

संघ ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस कड़वी सच्चाई को मीडिया के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा बिहार सरकार के उच्च पदाधिकारियों के समक्ष मजबूती से रखकर न्याय की मांग की जाएगी. बैठक में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो जून 2026 के बाद राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी. इस महत्वपूर्ण बैठक को कृष्णनंदन शर्मा, रामाकान्त गिरि, रामजी प्रसाद और कृष्ण कुमार आदि वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित कर अपनी एकजुटता प्रकट की.