UCC Row: यूसीसी पर बिहार में सियासत गरमाई, अमित शाह के बयान के बाद एनडीए में मतभेद!

UCC Row: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 से पहले देश के 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के बयान के बाद बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है।

यूसीसी पर बिहार में सियासत गरमाई- फोटो : social Media

UCC Row: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 से पहले देश के 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के बयान के बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है। इस मुद्दे पर न सिर्फ विपक्षी दल हमलावर हैं, बल्कि बिहार में एनडीए के भीतर भी विरोध और अलग-अलग सुर सुनाई देने लगे हैं।

 मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक समाप्त करने के बाद अब बीजेपी-एनडीए शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।

जनता दल यूनाइटेड नेता श्याम रजक ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी संसद में भले ही इसका समर्थन करे, लेकिन किसी भी कीमत पर यह कानून बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा।

 लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। पार्टी समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है और यूसीसी का औपचारिक प्रारूप सामने आने व व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही वे अपना अंतिम पक्ष रखेंगे।

 राष्ट्रीय जनता दल  ने यूसीसी को बीजेपी की नफरत की राजनीति करार दिया है। प्रवक्ता शक्ति यादव ने चेतावनी दी है कि मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम का कड़ा विरोध किया जाएगा और बिहार में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा।

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला: चिराग पासवान ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संविधान की पांचवीं-छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371A व 371G का जिक्र करते हुए विभिन्न जनजातियों और समुदायों को मिलने वाली पारंपरिक छूट का भी हवाला दिया है।

चिराग पासवान ने कहा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएं और रीति-रिवाज हैं। प्रारूप सार्वजनिक होने और व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही पार्टी इस पर निर्णय लेगी।

समान नागरिक संहिता को लेकर आया यह नया राजनीतिक तूफान आने वाले दिनों में एनडीए गठबंधन के भीतर अंदरूनी कलह को और बढ़ा सकता है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार इसे देश में एकरूपता और समानता लाने का बड़ा कदम बता रही है, वहीं क्षेत्रीय दल और विपक्ष इसे सामाजिक विविधता और अपने क्षेत्रीय वोटबैंक के लिहाज से एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं।