बिहार में पेट्रोल 11 और डीजल 5 रुपये महंगा क्यों? विधान परिषद में सुनील सिंह ने सम्राट सरकार को घेरा
RJD एमएलसी ने आरोप लगाया कि महंगे पेट्रोल और डीजल के कारण बिहार की जनता पर हर महीने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये बिहार की जनता की जेब से निकाले जा रहे हैं।
Bihar News : बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों का मुद्दा बिहार विधान परिषद में जोरदार तरीके से उठा। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एमएलसी सुनील सिंह ने पड़ोसी राज्यों की तुलना में बिहार में महंगे ईंधन को लेकर सरकार से सवाल किया और इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया। सुनील सिंह ने सदन में सवाल उठाया कि बिहार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में इतनी अधिक क्यों हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में पेट्रोल करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक महंगा है।
RJD एमएलसी ने आरोप लगाया कि महंगे पेट्रोल और डीजल के कारण बिहार की जनता पर हर महीने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये बिहार की जनता की जेब से निकाले जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से ईंधन की कीमतों में राहत देने की मांग की।
ईंधन की महंगाई पर मंत्री से भिड़े सुनील सिंह
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सुनील सिंह की सदन में मंत्री के साथ तीखी बहस भी हुई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब पड़ोसी राज्यों में ईंधन की कीमतें कम हैं, तो बिहार में आम लोगों को महंगा पेट्रोल और डीजल क्यों खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे कम आय वाले राज्य में ईंधन की ऊंची कीमतों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। परिवहन महंगा होने से इसका प्रभाव रोजमर्रा की जरूरतों और वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है।
होल्डिंग टैक्स पर भी सरकार को घेरा
पेट्रोल-डीजल के मुद्दे के बाद सुनील सिंह ने गांवों में लगाए जाने वाले होल्डिंग टैक्स को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों से अठन्नी-चवन्नी वसूलने के लिए गांवों तक पहुंचने की तैयारी कर रही है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने होल्डिंग टैक्स की वसूली से जुड़ी नियमावली को जनविरोधी और काला कानून बताया। सुनील सिंह ने कहा कि बिहार की करीब 76 प्रतिशत आबादी आज भी गांवों में रहती है और राज्य के लोगों की औसत प्रति व्यक्ति आय 76 हजार रुपये से कम है। उन्होंने कहा कि ऐसे राज्य में जहां करोड़ों लोग प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना पर निर्भर हैं, वहां गरीब ग्रामीणों पर अतिरिक्त टैक्स लगाना जनविरोधी फैसला है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए सुनील सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि सरकार अठन्नी-चवन्नी की वसूली के लिए गांव-गांव तक पहुंचेगी। उन्होंने पंचायतों के जरिए होल्डिंग टैक्स लगाने के फैसले की तुलना अंग्रेजों के दौर के दमनकारी फैसलों से की।