नितिन नवीन इस दिन संभालेंगे 2029 तक के लिए भाजपा की कमान? बंगाल चुनाव होगी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा, हो गई है पूरी तैयारी

Bihar Politics: भारतीय जनता पार्टी में बड़े सियासी बदलाव की आहट तेज हो चुकी है। खरमास समाप्त होते ही और गणतंत्र दिवस से पहले भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नाम पर लगभग मुहर लग चुकी है।

भाजपा को नया सरदार- फोटो : social Media

Bihar Politics: भारतीय जनता पार्टी में बड़े सियासी बदलाव की आहट तेज हो चुकी है। खरमास समाप्त होते ही और गणतंत्र दिवस से पहले भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नाम पर लगभग मुहर लग चुकी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 20 जनवरी को भाजपा अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो नितिन नवीन 2029 तक पार्टी संगठन की कमान संभालेंगे।

भाजपा के सांगठनिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया देशभर में पूरी हो चुकी है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से औपचारिकताएं निपटाई जा चुकी हैं। अब केवल तारीखों के ऐलान का इंतजार है और उसके चार दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। मोदी-शाह की भाजपा में फैसले चौंकाने वाले होते हैं, लेकिन इस बार विकल्प तलाशने की जरूरत शायद पार्टी नहीं समझ रही है।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल होगी। बंगाल में सत्ता हासिल करना भाजपा का पुराना सपना रहा है। ममता बनर्जी के किले को भेदना आसान नहीं है। ऐसे में युवा और ऊर्जावान नितिन नवीन किस रणनीति के साथ बंगाल फतह की राह निकालते हैं, इस पर पूरे देश की नजर रहेगी। इसके अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव भी उनके नेतृत्व की अग्निपरीक्षा साबित होंगे।

नितिन नवीन को लेकर शीर्ष नेतृत्व का भरोसा भी खुलकर सामने आ चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कर्मठ, विनम्र और संगठनात्मक अनुभव से लैस नेता बताया है, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने उनके लंबे सांगठनिक सफर और जमीनी अनुभव को रेखांकित किया है। युवा मोर्चा से लेकर प्रदेश प्रभारी और मंत्री तक का उनका सफर भाजपा के कैडर आधारित मॉडल को मजबूत करता है।

बिहार में मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पटना में हुआ उनका भव्य स्वागत और “पंचायत से पार्लियामेंट तक भगवा” का नारा इस बात का संकेत था कि तस्वीर अब साफ हो चुकी है। नितिन नवीन की पहचान न कायस्थ या बिहारी होने से बनी, बल्कि संगठनात्मक कौशल, कार्यकर्ताओं से जुड़ाव और विजन की स्पष्टता से बनी है।

भाजपा संगठन हमेशा मजबूत पकड़ और भविष्य की संभावना देखता है। नितिन नवीन में पार्टी को वही संभावना दिखी है। अब सवाल यही है क्या यह युवा नेतृत्व 2026-27 के चुनावी रण में भाजपा को और अजेय बना पाएगा? इसका जवाब आने वाला वक्त देगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि खरमास के बाद भाजपा की सियासत में नया अध्याय लिखे जाने वाला है।