प्रेमचंद रंगशाला में गूंजा नारी शक्ति का संदेश, 'या देवी सर्वभूतेषु' के मंचन ने दर्शकों को किया भावुक
नारी सशक्तिकरण पर आधारित नाटक 'या देवी सर्वभूतेषु' का निर्देशन आशुतोष कुमार ने किया। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नारी केवल ममता और करुणा की प्रतीक नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वाली अदम्य शक्ति भी है।
Bihar News : राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला में विमला फाउंडेशन द्वारा बिहार सरकार के सहयोग से आयोजित 'साहित्य, संगीत एवं नाट्य समागम' के तहत नारी सशक्तिकरण पर आधारित नाटक 'या देवी सर्वभूतेषु' का प्रभावशाली मंचन किया गया। सशक्त कहानी, जीवंत अभिनय, मधुर संगीत और प्रभावी निर्देशन से सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों का भरपूर प्रेम और सराहना हासिल की।
कार्यक्रम की शुरुआत देवी वंदना "हे माता तेरा आह्वान" से हुई, जिसने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। इसके बाद मंच पर प्रस्तुत नाटक ने प्रेम, संघर्ष, सामाजिक चेतना और नारी शक्ति के विभिन्न आयामों को प्रभावशाली ढंग से उकेरा। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नारी केवल ममता और करुणा की प्रतीक नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वाली अदम्य शक्ति भी है।
नाटक का निर्देशन आशुतोष कुमार ने किया। उन्होंने आधुनिक सामाजिक संदर्भों के साथ कथा को इस तरह मंच पर प्रस्तुत किया कि दर्शक शुरुआत से लेकर अंत तक प्रस्तुति से जुड़े रहे। विशेष रूप से चरम दृश्य, जिसमें शक्ति चंडी का रूप धारण कर अत्याचार का अंत करती है, ने दर्शकों को भावुक करने के साथ रोमांचित भी किया। संगीत परिकल्पना राजू मिश्रा और संगीत सहयोगी मो. जॉनी ने लोकधुनों, देवी स्तुति और नाट्य संगीत का प्रभावी समन्वय प्रस्तुत किया। वहीं अजीत कुमार की प्रकाश व्यवस्था और गौतम गुलाल के सह-निर्देशन ने मंचन को और अधिक प्रभावशाली बनाया।
अत्याचारी मानसिकता का सशक्त चित्रण
नाटक में सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निभाया। माधव और शक्ति के पात्रों ने प्रेम, विश्वास और संघर्ष की भावनाओं को जीवंत किया, जबकि ठाकुर की भूमिका में कलाकार ने अत्याचारी मानसिकता का सशक्त चित्रण किया। संवाद अदायगी, मंच उपस्थिति और सामूहिक अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
नाटक से बड़ा संदेश
प्रस्तुति के समापन पर दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का अभिवादन किया और नाटक के सामाजिक संदेश की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। नाटक ने यह संदेश दिया कि नारी का सम्मान, शिक्षा और सशक्तिकरण ही एक सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। इस नाटक की कहानी लेखिका ममता मेहरोत्रा ने लिखी है। नाट्य रूपांतरण, परिकल्पना एवं निर्देशन आशुतोष कुमार ने किया। संगीत परिकल्पना राजू मिश्रा, संगीत सहयोग मो. जॉनी, प्रकाश व्यवस्था अजीत कुमार तथा सह-निर्देशन गौतम गुलाल ने संभाला।
नाट्य प्रस्तुति से पहले आयोजित उद्घाटन समारोह में लेखिका ममता मेहरोत्रा सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक सफल सांस्कृतिक कार्यक्रम साबित हुआ, बल्कि नारी सम्मान और सामाजिक जागरूकता का प्रभावी संदेश देने में भी सफल रहा।