Bihar Holi 2026: होलिका जहां अग्नि में हुई थी भस्म, वहीं हुआ 40 फीट की होलिका का दहन, राजकीय शान के साथ गूंजा जयकारा
Bihar Holi 2026: पौराणिक मान्यता है कि बिहार से हीं पूरे देश में होलिका दहन की शुरुआत हुई थी।...
Bihar Holi 2026: होलिका का दहन हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रुप में पूरे देशभर में मनाया जाता है। वहीं,बिहर के पूर्णिया में नरसिंह अवतार भक्त प्रह्लाद मंदिर परिसर में राजकीय समारोह के रूप में होलिका दहन मनाया जाता है पूर्णिया जिले के बनमनखी स्थित सिकलीगढ़ धरहरा में आस्था, परंपरा और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला। नरसिंह अवतार भक्त प्रह्लाद मंदिर परिसर में राजकीय समारोह के रूप में होलिका दहन मनाया गया।
पौराणिक मान्यता है कि यहीं से पूरे देश में होलिका दहन की शुरुआत हुई थी। इसी आस्था के साथ 40 फीट ऊंची विशाल होलिका के पुतले का दहन किया गया, जिसके साथ आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा।
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में जब होलिका दहन हुआ तो “नरसिंह भगवान की जय” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। मंच से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति हुई, जिसमें बॉलीवुड गायक विनोद राठौड़ ने अपने सुरों से समां बांध दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह और बनमनखी विधायक सह सत्तारूढ़ दल के सचेतक कृष्ण कुमार ऋषि ने किया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने इस आयोजन के पौराणिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां की ऐतिहासिक और धार्मिक गरिमा को देखते हुए सरकार ने इसे राजकीय समारोह का दर्जा दिया है।
नरसिंह अवतार मंदिर ट्रस्ट के सचिव राकेश सिंह ने बताया कि मान्यता है कि इसी पावन धरती पर भगवान नरसिंह खंभे से प्रकट हुए थे और राक्षस राजा हिरण्यकश्यप का संहार कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। यही वह स्थल है जहां होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई थी और भक्ति की जीत हुई थी।
साल 2016 से यहां राजकीय स्तर पर होलिका दहन का आयोजन हो रहा है, और पिछले 11 वर्षों से यह परंपरा निरंतर जारी है। आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का यह संगम बनमनखी को विशेष पहचान दिला रहा है।
रिपोर्ट- अंकित कुमार