समस्तीपुर DTO ऑफिस और फिटनेस सेंटर में अवैध वसूली! UPI आईडी पर मांगी जा रही 'मुंह मांगी रकम'
समस्तीपुर परिवहन कार्यालय और ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का आरोप! संघ का दावा है कि फिटनेस के नाम पर UPI के ज़रिए 'मुंह मांगी रकम' वसूली जा रही है। मामले की शिकायत DM, CM और परिवहन विभाग के आला अधिकारियों से की गई है।
समस्तीपुर के जिला परिवहन कार्यालय (DTO) और ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। जिला मोटर व्यवसायी संघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने समस्तीपुर के जिलाधिकारी (DM) को लिखित आवेदन देकर डीटीओ प्रवीण कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि डीटीओ की पदस्थापना के बाद से ही परिवहन कार्यालय में दलालों का बोलबाला बढ़ गया है और वाहन मालिकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। समस्तीपुर DTO से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
यूपीआई आईडी के जरिए मांगी जा रही 'मुंह मांगी रकम'
संघ का सीधा आरोप है कि समस्तीपुर स्थित ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर में वाहनों की फिटनेस जांच के नाम पर सरकारी चालान के अतिरिक्त भारी वसूली की जा रही है। यह अवैध राशि या तो नकद ली जा रही है या फिर एक विशिष्ट यूपीआई आईडी (9205174798 - विकास कुमार ठाकुर) पर ट्रांसफर कराई जा रही है। संघ का दावा है कि उनके पास इस अवैध लेनदेन से जुड़े कई पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध हैं।
कार्यालय से गायब रहते हैं डीटीओ, शिकायतों की अनदेखी
शिकायतकर्ता के अनुसार, डीटीओ प्रवीण कुमार के पास जिला भू-अर्जन पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी है। वे अधिकांश समय भू-अर्जन कार्यालय में ही व्यतीत करते हैं और परिवहन कार्यालय में बहुत कम समय के लिए आते हैं, जिससे आम लोगों की सुनवाई नहीं हो पाती। संघ ने इससे पहले भी लिखित शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में प्रशासनिक अधिकारियों की भी मूक सहमति है।
दलालों के प्रभाव पर रोक और जांच की उठी मांग
संघ का आरोप है कि अधिकारी के नियमित रूप से न बैठने के कारण कार्यालय के भीतर और बाहर बिचौलियों का जमावड़ा लगा रहता है। यहाँ तक कि वाहन चेकिंग अभियान में भी बाहरी दलालों का सहयोग लिया जा रहा है। संघ ने मांग की है कि किसी स्वतंत्र अधिकारी की टीम गठित कर ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इस शिकायत की प्रतियाँ मुख्यमंत्री, प्रधान सचिव (परिवहन) और राज्य परिवहन आयुक्त को भी प्रेषित की गई हैं।
धीरज पराशर की रिपोर्ट