शर्मनाक है SP साहेब ! 5 दिन बाद भी दुष्कर्म के आरोपी की गिरफ्तारी तक नहीं हो पाई, विधवा मां और ग्रामीण लगा रहे गुहार

शेखपुरा जिले में 21 वर्षीय छात्रा के साथ हुए कथित दुष्कर्म मामले में पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। एसपी हिमांशु कुमार ने ग्रामीणों को 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह समय भी खत्म हो गया है....

दुषकर्म के आरोपी की गिरफ्तारी की पीड़ित परिवार कर रहा मांग- फोटो : उमेश

Sheikhpura : बिहार के शेखपुरा जिले में 21 वर्षीय छात्रा के साथ हुए कथित दुष्कर्म मामले में पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। स्थानीय पुलिस की ढीली कार्यशैली से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने बीते शुक्रवार को पुलिस कप्तान (एसपी) कार्यालय का घेराव कर न्याय की गुहार लगाई थी। उस समय एसपी हिमांशु कुमार ने ग्रामीणों को 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार करने का सख्त आश्वासन दिया था। हालांकि, यह डेडलाइन रविवार को ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से अबतक कार्रवाई या गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


परीक्षा देकर लौट रही छात्रा को खेतों में किया अगवा

पीड़िता के वकील आशुतोष सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक वारदात बीते 7 जुलाई की है। करंडे थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा बीए की परीक्षा देने के लिए सीएबी कॉलेज हथियावां गई थी। परीक्षा खत्म होने के बाद जब वह शाम करीब 6:00 बजे चेवाड़ा से साइकिल लेकर वापस अपने घर लौट रही थी, तभी रास्ते में केवाली गांव निवासी बाल्मीकि यादव के पुत्र अजय कुमार यादव ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। आरोपी ने छात्रा को रास्ते से ही जबरन अगवा कर लिया और पास के खेतों में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया।


साक्ष्य मिटाने के लिए हत्या का प्रयास, राहगीरों ने बचाया

वकील ने आरोप लगाया कि दुष्कर्म की वारदात के बाद आरोपी अजय कुमार यादव ने साक्ष्य मिटाने और अपनी पहचान छुपाने के उद्देश्य से छात्रा की गला दबाकर हत्या करने की भी कोशिश की। इसी बीच छात्रा की चीख-पुकार सुनकर रास्ते से गुजर रहे कुछ राहगीर खेतों की तरफ दौड़ पड़े। लोगों को अपनी ओर आता देख आरोपी घबरा गया और पीड़िता को लहूलुहान हालत में छोड़कर मौके से भाग खड़ा हुआ। राहगीरों और ग्रामीणों की सूझबूझ से छात्रा की जान तो बच गई, लेकिन इस घटना ने उसे गहरे मानसिक और शारीरिक सदमे में डाल दिया है।


मामला दर्ज करने में आनाकानी और मेडिकल में देरी

इस मामले में पुलिसिया लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता की परतें भी सामने आई हैं। वकील आशुतोष कुमार के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद जब ग्रामीण पीड़िता को लेकर करंडे थाना पहुंचे, तो वहां महिला पुलिस कर्मी न होने का बहाना बनाकर थानाध्यक्ष ने केस दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद रात में ही पीड़िता को शेखपुरा महिला थाना ले जाया गया, जहां वकील के कड़े हस्तक्षेप के बाद आखिरकार मामला दर्ज हुआ। यही नहीं, रात 2:00 बजे सदर अस्पताल पहुंचने के बावजूद ड्यूटी पर डॉक्टर न होने के कारण पीड़िता का मेडिकल परीक्षण अगले दिन 8 जुलाई को हो सका।


वरीय अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप, हाई कोर्ट जाने की चेतावनी

पीड़िता के वकील आशुतोष सिंह ने वरीय पुलिस पदाधिकारियों पर मामले को दबाने और जघन्य दुष्कर्म को प्रेम प्रसंग का रूप देने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में भी एसपी या डीएसपी का घटनास्थल पर न जाना पुलिस की घोर लापरवाही को दर्शाता है। इस खौफ और सामाजिक बदनामी के डर से पीड़िता और उसकी विधवा मां गांव छोड़ने को विवश हैं। वकील ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करेंगे।


गांव छोड़ना चाहती है पीड़िता और उसकी मां


वकील आशुतोष कुमार ने बताया कि घटना के बाद पीड़िता और उसकी विधवा मां इतनी डर गई है कि वह गांव छोड़ना चाह रही है। पीड़िता के पिता की बहुत पहले मौत हो चुकी है। गरीबी और बदनामी के कारण दोनों मां बेटी गांव छोड़ने पर विवश हैं।हालांकि अब इस मामले में पीड़िता के गांव वाले खुलकर उसके सपोर्ट में आ गए हैं। जिसके बाद मामले ने अब जिले में तूल पकड़ लिया है।

उमेश की रिपोर्ट