Bihar DM became teacher:कलेक्टर नहीं,गुरु बनकर आईं डीएम मैम,ब्लैकबोर्ड पर बच्चों को दिया कामयाबी का गुरुमंत्र, छात्रों ने भी ने दिए झटपट जवाब
Bihar DM became teacher:बिहार की सरज़मीं पर उस समय दिलचस्प मंजर देखने को मिला, जब डीएम ने अफ़सरशाही का लिबास उतारकर टीचर का किरदार अदा किया।
Bihar DM became teacher:बिहार की सरज़मीं पर उस वक़्त दिलचस्प मंजर देखने को मिला, जब जिला प्रशासन की मुखिया प्रतिभा रानी ने अफ़सरशाही का लिबास उतारकर टीचर का किरदार अदा किया।शिवहर जिलाधिकारी चमनपुर स्कूल में उनका यह अंदाज़ न सिर्फ़ हैरतअंगेज़ था, बल्कि शिक्षा के मंदिर को आईना दिखाने वाला भी साबित हुआ।
डीएम मैम सीधे क्लासरूम में दाख़िल हुईं और बच्चों के बीच बैठकर पढ़ाई की हक़ीक़त परखी। ब्लैकबोर्ड पर सवाल लिखवाए, जवाब सुने और हर सही जवाब पर बच्चों का हौसला अफ़ज़ाई भी किया। माहौल एकदम जुदा था न कोई डर, न कोई हिचक बच्चों ने भी पूरे जोश के साथ हर सवाल का जवाब दिया।
उन्होंने बुनियादी कक्षाओं (1, 2 और 3) में जाकर खुद टीचिंग की कमान संभाली। इंग्लिश स्पेलिंग और मीनिंग पूछकर रीडिंग स्किल का जायज़ा लिया, जिसमें बच्चों ने फुर्ती और समझदारी का शानदार मुज़ाहिरा किया। इस दौरान डीएम ने शिक्षकों की मौजूदगी पर भी बच्चों से सीधी पूछताछ कर तालीमी सिस्टम की नब्ज टटोली।
हेडमास्टर से नामांकन और उपस्थिति का ब्योरा लिया गया, वहीं बच्चों को दिल से पढ़ने, आगे बढ़ने और अपने घर-परिवार के साथ-साथ जिले का नाम रौशन करने का पैग़ाम दिया गया। डीएम मैम ने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि तालीम ही तरक्की की असली चाबी है।
इस मौके पर नव-नामांकित बच्चों को नई किताबें भी बांटी गईं, जिससे उनके चेहरों पर खुशी साफ़ झलक रही थी। साथ ही अभिभावकों को ताकीद की गई कि वे बच्चों को रोज़ाना स्कूल भेजें।
डीएम ने शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य तय करते हुए टोला सेवक, विकास मित्र और शिक्षकों को घर-घर जाकर हर बच्चे का नामांकन सुनिश्चित करने का हुक्म दिया। खास तौर पर 6 साल पूरे कर चुके आंगनवाड़ी बच्चों को कक्षा 1 में दाख़िला दिलाने पर ज़ोर दिया गया। शिवहर में यह डीएम क्लास अब सियासत नहीं, बल्कि शिक्षा की नई मिसाल बन गई है।
रिपोर्ट- मनोज कुमार सिंह