दावों की खुली पोल! सीवान के 'मॉडल अस्पताल' में एंबुलेंस नहीं मिली, तो ठेले पर बेटे का शव ले गई बेबस मां

सीवान सदर अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो स्वास्थ्य व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ा रही है।मौत के बाद अस्पताल ने एंबुलेंस तो दूर,एक स्ट्रेचर तक नहीं दिया।रोती-बिलखती बेबस मां अपने बेटे के शव को हाथ-ठेले पर लादकर घर ले गई

'मॉडल अस्पताल' में एंबुलेंस नहीं मिली, तो ठेले पर बेटे का शव ले गई बेबस मां - फोटो : Reporter

सीवान के सदर अस्पताल (मॉडल अस्पताल) से मानवता को शर्मसार करने वाली एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहां शनिवार की रात एक मरीज की मौत के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई, जिसके बाद बेबस मां अपने बेटे के शव को ठेले पर लादकर घर ले जाने को मजबूर हो गई। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


एंबुलेंस तो दूर, स्ट्रेचर तक नहीं मिला

मृतक की पहचान सीवान शहर के मौली के बथान निवासी विक्की कुमार के रूप में हुई है। शनिवार की रात इलाज के दौरान विक्की ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल के किसी भी कर्मी ने उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध कराने की जहमत नहीं उठाई। हद तो तब हो गई जब शव को वार्ड से बाहर लाने के लिए अस्पताल से एक स्ट्रेचर तक नहीं दिया गया। अपनों को खोने के गम में डूबे और व्यवस्था से लाचार परिजन आखिरकार एक हाथ-ठेले का इंतजाम करने पर मजबूर हुए।

रोती-बिलखती मां और ठेले पर बेटे का शव

अस्पताल से घर की दूरी तय करने के लिए जब रोती-बिलखती मां अपने बेटे के शव को ठेले पर लेकर निकली, तब वहां मौजूद मीडियाकर्मियों की नजर उन पर पड़ी। पूछने पर रोती हुई मां ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद या एंबुलेंस नहीं दी गई। इस मर्मस्पर्शी दृश्य को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। अस्पताल परिसर में मौजूद लोग यह देखकर दंग थे कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस 'मॉडल अस्पताल' की जमीनी हकीकत इतनी खोखली है।


दावों की खुली पोल, सरकार से कार्रवाई की मांग

सीवान का यह अस्पताल हाल ही में हाईटेक और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के साथ 'मॉडल अस्पताल' बना था, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधाएं मिल सकें। लेकिन इस घटना ने बिहार के स्वास्थ्य महकमे की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार ने इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि सरकार इस मामले पर क्या कड़ा एक्शन लेती है या हर बार की तरह इसे भी रफा-दफा कर दिया जाता है।

रिपोर्ट - ताबिश इरशाद