सुपौल के 7 वर्षीय गीतांक आयुष ने रचा इतिहास, नेशनल लेवल की जूनियर कराटे चैंपियनशिप में जीता गोल्ड मेडल
सुपौल जिले के एक छोटे से गांव रामपुर के सात वर्षीय बालक गीतांक आयुष ने महज सात साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर आयुष ने अपने माता-पिता, बल्कि पूरे बिहार और देश का मान बढ़ाया है....
Supaul : जिले के एक छोटे से गांव रामपुर के रहने वाले सात वर्षीय बालक गीतांक आयुष ने अपनी अद्भुत प्रतिभा के दम पर खेल जगत में इतिहास रच दिया है। अजय कुमार के पुत्र गीतांक ने नेशनल लेवल की जूनियर कराटे चैंपियनशिप-2026 के अंडर-25 वेट कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) अपने नाम किया है। महज सात साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर आयुष ने न सिर्फ अपने माता-पिता, बल्कि पूरे बिहार और देश का मान बढ़ाया है।
गांव पहुंचने पर फूल-मालाओं से हुआ भव्य स्वागत, उमड़ा जनसैलाब
गीतांक आयुष की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की खबर जैसे ही सुपौल पहुंची, पूरे रामपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। राष्ट्रीय चैंपियन बनने के बाद जब नन्हा खिलाड़ी पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचा, तो ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछाकर उसका अभिनंदन किया। ग्रामीणों ने आयुष को फूल-मालाओं से लाद दिया और उसके सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस अभिनंदन समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, युवा, महिलाएं और आसपास के गांवों के लोग नन्हे सितारे को आशीर्वाद देने पहुंचे।
पिता बोले- बचपन से ही मार्शल आर्ट और खेल के प्रति था गहरा लगाव
आयुष की इस स्वर्णिम सफलता से उसके परिवार में जश्न का माहौल है। बधाई देने वालों का घर पर तांता लगा हुआ है। गौरवमयी क्षणों को साझा करते हुए पिता अजय कुमार ने बताया कि आयुष को बचपन से ही कराटे और खेलकूद के प्रति गहरा लगाव था। कराटे सीखने के दौरान उसने कभी भी अपने कड़े अभ्यास और अनुशासन से समझौता नहीं किया। परिवार के अटूट सहयोग और आयुष की दिन-रात की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वह इस मुकाम पर खड़ा है।
ग्रामीणों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना आयुष, गांव के अन्य बच्चे भी उत्साहित
सम्मान समारोह के दौरान प्रबुद्ध ग्रामीणों ने कहा कि गीतांक आयुष ने इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के भारी दबाव को झेलते हुए जैसा प्रदर्शन किया है, वह उसकी मानसिक दृढ़ता और बेहतरीन कौशल को दर्शाता है। उसकी इस जादुई सफलता को देखकर गांव के अन्य बच्चे भी खेल के प्रति बेहद प्रेरित हो रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि आयुष की यह जीत आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ा मार्गदर्शक बनेगी और क्षेत्र से कई और नए खिलाड़ी देश का नाम रोशन करने आगे आएंगे।
ग्रामीणों ने की प्रतिभावान खिलाड़ियों को सरकारी प्रोत्साहन और सुविधाएं देने की मांग
इस मौके पर उपस्थित लोगों ने नन्हे खिलाड़ी आयुष के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश के लिए पदक जीतेगा। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खेल विभाग से अपील की कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी ऐसी अद्वितीय प्रतिभाओं को समय पर सही प्रशिक्षण, खेल संसाधन और आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि खेल की दुनिया में बिहार के गांवों की मिट्टी का गौरव वैश्विक पटल पर चमक सके।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट