किसान सलाहकारों का फूटा गुस्सा: 1.20 करोड़ के ईपीएफ घोटाले के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू

बिहार के सुपौल में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया गया है। जिला कृषि कार्यालय के समक्ष बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ द्वारा करोड़ों रुपये के ईपीएफ (EPF) घोटाले के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का बुधवार को आगाज किया गया..

ईपीएफ घोटाले के खिलाफ किसान सलाहकारों का आंदोलन- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul  : जिला मुख्यालय स्थित जिला कृषि कार्यालय के समक्ष बुधवार को बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ की जिला इकाई द्वारा एक विशाल प्रदर्शन किया गया। ईपीएफ (EPF) घोटाले में शामिल सभी दोषियों पर अविलंब कानूनी कार्रवाई करने और गबन की गई राशि की शत-प्रतिशत वापसी को लेकर संघ ने अपने चरणबद्ध आन्दोलन का शंखनाद कर दिया है। जिला अध्यक्ष सचिन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे किसान सलाहकारों ने व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपने हक की आवाज बुलंद की।


खून-पसीने की कमाई का हुआ गबन, दोषियों को जेल भेजने की मांग

आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमन कुमार ने कहा कि 1.20 करोड़ रुपये की राशि कोई मामूली रकम नहीं है। यह ईपीएफ किसी सरकार या अधिकारी की मेहरबानी नहीं, बल्कि रात-दिन एक करने वाले किसान सलाहकारों के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि प्रशासन को एक-एक पाई लौटानी होगी और इस महाघोटाले के दोषियों को जेल जाना ही होगा। डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि यह आन्दोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ है।


आर्थिक अपराध इकाई (EOU) या स्पेशल विजिलेंस से उच्च स्तरीय जांच की मांग

प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए संघ के नेताओं ने बताया कि इस घोटाले में फर्जी निकासी, राशि को गलत खातों में ट्रांसफर करने और कर्मचारियों की बिना सहमति के पैसा निकालने जैसे कई संगीन और गंभीर मामले सामने आए हैं। यह सीधे तौर पर किसान सलाहकार के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। संघ ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे ईपीएफ घोटाले की उच्च स्तरीय जांच 'आर्थिक अपराध इकाई' (EOU) या 'स्पेशल विजिलेंस' से कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।


30 दिनों का अल्टीमेटम, ब्याज सहित राशि वापस करने की चेतावनी

जिला अध्यक्ष सचिन कुमार सिंह ने जिला प्रशासन और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आज का यह कार्यक्रम पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीके से किया गया है। लेकिन, अगर इस मामले में अविलंब कोई ठोस और दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में इस आन्दोलन को और अधिक तेज व उग्र किया जाएगा। संघ ने मांग रखी है कि सभी पीड़ित किसान सलाहकारों की मेहनत की एक-एक पाई 30 दिनों के भीतर ब्याज सहित उनके बैंक खातों में वापस ट्रांसफर की जाए।


आंदोलन में एकजुट हुए जिलेभर के किसान सलाहकार, आर-पार की लड़ाई का संकल्प

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने संकल्प लिया कि जब तक दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होती और पीड़ितों का पैसा वापस नहीं मिलता, तब तक यह चरणबद्ध आन्दोलन लगातार जारी रहेगा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला सचिव पप्पू कुमार, जिला कोषाध्यक्ष सुशील कुमार के साथ-साथ रणविजय कुमार, उमेश कुमार मेहता, मो. जफर, उपेन्द्र कामत, विजय कुमार, उमाकांत कामत, अशोक मंडल, हेमंत कुमार, बमबम कुमार, पिन्टू पासवान, दिनेश राम, संजीव कुमार, चंदन सिंह, माधव झा, भवेश कुमार, मो. फजरूल रहमान, कृष्णा कुमार और प्रवीन कुमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट