कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में फिर दिखी गंगा डॉल्फिन, पर्यावरण प्रेमियों में उत्साह की लहर

सुपौल जिले के कोसी नदी के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी के बीच एक सुखद तस्वीर सामने आई है। वीरपुर स्थित कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में गुरुवार की सुबह एक बार फिर राष्ट्रीय जलीय जीव 'गंगा डॉल्फिन' अठखेलियां करती नजर आई...

कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में फिर दिखी गंगा डॉल्फिन- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले के वीरपुर में कोसी नदी के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी के बीच एक सुखद तस्वीर सामने आई है। वीरपुर स्थित कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में गुरुवार की सुबह एक बार फिर राष्ट्रीय जलीय जीव 'गंगा डॉल्फिन' अठखेलियां करती नजर आई। इस दुर्लभ जलीय जीव के दिखाई देने से स्थानीय निवासियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पानी की सतह पर डॉल्फिन के दिखने की यह खबर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


कोसी महासेतु तक का क्षेत्र डॉल्फिन के अनुकूल

वीरपुर और आसपास के कोसी नदी क्षेत्र में गंगा डॉल्फिन का दिखना कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले साल 2024 में वन्यजीव अभ्यारण्य पटना और दिल्ली की एक संयुक्त टीम ने तीन दिवसीय कोसी प्रवास किया था। इस दौरान पक्षियों की गणना के साथ-साथ कोसी नदी में गंगा डॉल्फिन की स्थाई मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि भी की गई थी। विशेषज्ञों के दल ने अपने गहन अध्ययन के बाद कोसी बराज से लेकर कोसी महासेतु तक के पूरे नदी क्षेत्र को डॉल्फिन के रहने के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित आवास घोषित किया था।


मुख्य अभियंता संजीव शैलेश ने खुद देखने की बात स्वीकारी 

बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण विभाग, वीरपुर के मुख्य अभियंता संजीव शैलेश ने भी इस रोमांचक खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी इस क्षेत्र में पांच से छह बार गंगा डॉल्फिन को पानी की सतह पर देखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका आकार काफी बड़ा है, जिससे इसकी पहचान गंगा डॉल्फिन के रूप में पुख्ता होती है। यह जलीय जीव प्रायः कोसी बराज के फाटक संख्या 26, 27 और 36 के आसपास के गहरे पानी वाले हिस्सों में दिखाई देता है। हालांकि, कोसी में इनकी कुल आबादी कितनी है, इसका कोई सटीक सरकारी आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।


संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की मांग

मुख्य अभियंता संजीव शैलेश के अनुसार, वर्तमान में विभाग की ओर से डॉल्फिन के संरक्षण या उनके संवर्धन के लिए कोई विशेष तकनीकी व्यवस्था नहीं की गई है। इसके बावजूद, कोसी के तेज बहाव और बदलती जलधारा के बीच गंगा डॉल्फिन की लगातार मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) इनके अनुकूल है। इस सकारात्मक संकेत को देखते हुए स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने सरकार से इस दुर्लभ जीव को बचाने के लिए विशेष पहल करने की मांग की है।


जैव विविधता के लिए बेहद शुभ संकेत

कोसी नदी में डॉल्फिन का पाया जाना क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और जलीय जैव विविधता के लिए बेहद शुभ संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉल्फिन की मौजूदगी नदी के पानी की शुद्धता और स्वस्थ जलीय वातावरण को दर्शाती है। यदि इस क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित किया जाए और इसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, तो आने वाले समय में कोसी नदी में गंगा डॉल्फिन की संख्या में और अधिक इजाफा देखने को मिल सकता है।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट