'डाइट' का विशेष सेमिनार संपन्न: 127 शिक्षकों को मिला मानसिक और भावात्मक संतुलन का मंत्र, बच्चों के विकास में निभाएंगे बड़ी भूमिका

सुपौल में 'डाइट' का विशेष सेमिनार संपन्न- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), बसहा में शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य और भावात्मक कल्याण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चल रहा पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 15 जून से शुरू हुए इस अनूठे प्रशिक्षण सत्र में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए 127 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बेहद उत्साह के साथ भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बदलते सामाजिक परिवेश में शिक्षकों को मानसिक और भावनात्मक रूप से इस कदर दक्ष बनाना था, ताकि वे स्कूल के क्लासरूम में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अधिक प्रभावी और सकारात्मक भूमिका निभा सकें।


तनाव प्रबंधन से लेकर संबंधों के बेहतर संचालन तक की मिली सीख

डाइट बसहा में आयोजित इस पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के दौरान भाग ले रहे शिक्षक प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान विशेष रूप से भावनात्मक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण, शिक्षकों के बीच सहयोगीकरण के कौशल, भावात्मक समझ, कार्यस्थल व समाज में संबंधों का कुशल प्रबंधन तथा कठिन परिस्थितियों में समस्या समाधान (प्रॉब्लम सॉल्विंग) जैसे गंभीर पहलुओं पर बारीकी से व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।


सकारात्मक दृष्टिकोण से ही होगा स्कूल और समाज का कल्याण: प्रभारी प्राचार्य

समारोह के समापन सत्र को संबोधित करते हुए डाइट के प्रभारी प्राचार्य अखलाक खान ने भावात्मक कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के अंतर्संबंधों पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के बदलते सामाजिक और शैक्षिक माहौल में शिक्षकों के भीतर भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास होना बेहद जरूरी है। प्राचार्य ने जोर देकर कहा कि जो व्यक्ति मानसिक रूप से पूरी तरह सशक्त और संतुलित होता है, वही अपने परिवार, स्कूल और अंततः पूरे समाज के कल्याण में अपना सार्थक योगदान दे सकता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से हमेशा सकारात्मक सोच, अटूट आत्मविश्वास और समाज में एक आदर्श आचरण अपनाने की अपील की।


आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है मेंटल हेल्थ: आफताब आलम

प्रशिक्षण प्रभारी मोहम्मद आफताब आलम ने इस पूरे कार्यक्रम के उद्देश्यों और वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और भावात्मक कल्याण को सिर्फ किताबी ज्ञान न मानकर इसे वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक आवश्यकताओं में से एक माना जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन में आने वाली हर छोटी-बड़ी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है। उन्होंने दैनिक जीवन में तनाव प्रबंधन (स्ट्रेस मैनेजमेंट), आत्म-जागरूकता, सहयोगी संबंध तथा एक संतुलित जीवनशैली को मानसिक स्वास्थ्य का प्रमुख आधार बताते हुए इन्हें आत्मसात करने पर बल दिया।


समूह चर्चा और व्यावहारिक अभ्यासों के जरिए व्याख्याताओं ने सिखाए गुर

इस पांच दिवसीय सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में डाइट के व्याख्याताओं ने मुख्य भूमिका निभाई। विभिन्न सत्रों का कुशल संचालन व्याख्याता अभिषेक कुमार, निरंजन कुमार, मदन कुमार, इम्तेयाज अनवर और प्रशिक्षिका सुषमा श्रेष्ठा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इन अनुभवी प्रशिक्षकों ने केवल व्याख्यान देने के बजाय सहभागितापूर्ण गतिविधियों, लाइव ग्रुप डिस्कशन (समूह चर्चा) और कई व्यावहारिक अभ्यासों (प्रैक्टिकल एक्सरसाइज) के माध्यम से सभी शिक्षक प्रतिभागियों को विषयवस्तु से सीधे जोड़ने का प्रयास किया, जिससे ट्रेनिंग बोरिंग न होकर बेहद रोचक बन गई।


शिक्षकों ने कहा- विद्यार्थियों और सहकर्मियों के साथ संवाद में मिलेगी मदद

ट्रेनिंग के आखिरी दिन समापन के मौके पर उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने इस प्रशिक्षण को अपने करियर और निजी जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक बताया। फीडबैक देते हुए प्रतिभागियों ने कहा कि इस पांच दिवसीय सत्र से उनके सोचने के नजरिए में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें स्कूल लौटने पर विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति को समझने, उनके माता-पिता व सहकर्मियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और रोजमर्रा के काम के दौरान सामने आने वाली भावनात्मक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में बहुत अधिक सहायता मिलेगी।

विनय कुमार मिश्र