Gold Monetization Scheme: घर में रखा सोना अब देगा ब्याज! सरकार GMS को आसान बनाने की तैयारी में
Gold Monetization Scheme: घर में रखे सोने से ब्याज कमाने का मौका मिल सकता है। केंद्र सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को आसान बनाने वाली नई व्यवस्था पर काम कर रही है।
Gold Monetization Scheme: निवेश के लिए लोग आमतौर पर FD, SIP और दूसरे विकल्पों को पसंद करते हैं। लेकिन अगर आपके घर में सोने के गहने, सिक्के या गोल्ड बार रखे हैं, तो आने वाले समय में यह सोना भी आपके लिए कमाई का जरिया बन सकता है। केंद्र सरकार ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत घर में रखे सोने को जमा कर उस पर ब्याज पाने का रास्ता आसान किया जा सकता है।
क्या है सरकार की नई योजना?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है जिसमें लोग अपने घर में रखा सोना नजदीकी प्रमाणित ज्वैलर के पास जमा कर सकेंगे। इसके बदले उन्हें ब्याज मिलने की व्यवस्था हो सकती है। इसमें सोने के गहने, सिक्के और बार जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी इस योजना का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, इसलिए ब्याज दर, जमा करने की अवधि और दूसरी शर्तों की अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
ज्वैलर्स की होगी अहम भूमिका
प्रस्तावित व्यवस्था में ज्वैलर्स की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। बताया जा रहा है कि सरकार इस योजना का ढांचा तैयार करने के लिए ज्वैलरी कारोबार से जुड़े लोगों से बातचीत कर रही है। सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रक्रिया तैयार करना है जिससे लोगों को सोना जमा करने के लिए बैंक या दूर स्थित सेंटर तक जाने की परेशानी न हो और वे अपने आसपास के प्रमाणित ज्वैलर के जरिए इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकें।
सरकार क्यों ला रही है यह योजना?
भारत में बड़ी मात्रा में सोना लोगों के घरों में रखा हुआ है। सरकार चाहती है कि इस सोने के एक हिस्से को आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाए।अगर घरों में रखा सोना इस तरह वित्तीय व्यवस्था में आता है तो इससे देश की सोने की जरूरत के कुछ हिस्से को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इससे सोने के आयात पर दबाव कम करने और अर्थव्यवस्था में पूंजी बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।
2015 में भी शुरू हुई थी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम
केंद्र सरकार ने साल 2015 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) शुरू की थी। इसके तहत लोग अपना सोना जमा करके उस पर ब्याज कमा सकते थे।हालांकि, इस योजना में सोना जमा करने की प्रक्रिया कई लोगों के लिए आसान नहीं थी। उन्हें बैंक या निर्धारित टेस्टिंग सेंटर तक जाना पड़ता था। इसी वजह से योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2025 तक करीब 10 साल में इस योजना के तहत लगभग 38 टन सोना ही जमा हो पाया।
नई व्यवस्था से क्या बदल सकता है?
नई योजना का मुख्य फोकस प्रक्रिया को आसान बनाना हो सकता है। अगर लोग अपने नजदीकी प्रमाणित ज्वैलर के जरिए सोना जमा कर सकें और उन्हें इसके बदले ब्याज मिले, तो इससे लोगों की भागीदारी बढ़ सकती है। फिलहाल यह योजना तैयारी के स्तर पर है। इसलिए निवेशकों को इसके आधिकारिक नियम, ब्याज दर और सोना वापस लेने से जुड़ी शर्तों की घोषणा का इंतजार करना चाहिए।